अपने खिलाफ अरेस्ट वारंट को चुनाव में भुनाने में जुटे नायडू

तेलुगू देशम पार्टी के प्रमुख एन चंद्रबाबू नायडू ने अपने खिलाफ गिरफ्तारी वारंट को तेलंगाना के आगामी चुनाव में बड़ा मुद्दा बनाने का फैसला किया है. आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री नायडू को संकट को भी अवसरों में बदलने की महारत के लिए जाना जाता है. बता दें कि नायडू के खिलाफ महाराष्ट्र की धर्माबाद कोर्ट ने 2010 के धरना प्रदर्शन से जुड़े मामले में गैर ज़मानती वारंट जारी कर रखा है.

टीडीपी के नेता एकजुट होकर इस मुद्दे को आगे बढ़ाने के लिए तमाम रणनीतियां बनाने में जुटे हैं. पार्टी अध्यक्ष नायडू से निर्देश मिलने के बाद पूरे तेलंगाना में प्रदर्शन की तैयारी है. नायडू ने एक बार फिर तेलुगू अस्मिता का मुद्दा उठाया है. साथ ही अपने खिलाफ नोटिस को सभी तेलुगुओं के खिलाफ नोटिस बताया है.

तेलुगू देशम का आरोप है कि बीते 8 साल में एक भी नोटिस जारी नहीं किया गया और अब नरेंद्र मोदी और महाराष्ट्र में बीजेपी सरकार की साजिश के चलते गिरफ्तारी वारंट भेजा गया है. पार्टी का सवाल है कि बिना किसी पूर्व नोटिस या वारंट के कैसे गैर ज़मानती वारंट जारी किया जा सकता है?

तेलुगू देशम ने ये आरोप भी लगाया है कि आंध्र प्रदेश के विकास मॉडल ने गुजरात के विकास मॉडल को कहीं पीछे छोड़ दिया तो असहिष्णुता के चलते पीएम मोदी षड्यंत्र की राजनीति का सहारा ले रहे हैं.

2010 में चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में टीडीपी ने महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के धर्माबाद में गोदावरी नदी पर बाबली प्रोजेक्ट के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था. ये इलाका तेलंगाना (तब आंध्र प्रदेश) की सीमा के साथ लगता है. तेलुगू देशम ने प्रोजेक्ट के सारे नियमों को ताक पर रख बनाने का आरोप लगाया, साथ ही कहा कि इससे राज्य को मिलने वाले पानी में कटौती हो जाएगी. 

नायडू समेत कई नेताओं को उस वक्त गिरफ्तार किया गया था. बाद में पुलिस ने उन्हें हैदराबाद वापस भेज दिया था.

 

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