अष्ट शिवलिंग की पूजा होती है विशेष फलदायी, षोडशोपचार से पूजन करेगा कमाल

हिन्द न्यूज डेस्क| महाशिवरात्रि पर अष्ट शिवलिंग की पूजा विशेष फलदायी साबित हो सकती है. इसके लिए पूजा भी खास तरह से करनी होती है.भगवान सदाशिव के अष्ट शिवलिंग- गौरीश्वर, इन्द्रेश्वर, भूतेश्वर, सिद्धेश्वर, बृहस्पतेश्वर, पिंगलेश्वर, महाकालेश्वर और पुष्पदंतेश्वर की साधना विशेष फलदायी मानी गयी है. इन अष्ट शिव लिंगों की अलग-अलग मंत्रशक्ति को जाग्रत करने के लिए सर्वप्रथम शिवलिंग का षोडशोपचार से पूजन कर मंत्र जाप करना चाहिए.

अष्ट शिवलिंग

फिर उन्हीं मंत्रों के अंत में स्वाहा जोड़ कर अग्नि में 108 आहुतियां अर्पित करने का नियम है। यह साधना शिव कल्प के अतिरिक्त किसी भी प्रदोष से भी शुरू की जा सकती है, लेकिन महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है.समृद्धि, ऐश्वर्य, पूर्ण सौभाग्य, सौन्दर्य, यौवन और गृह-क्लेश निवारण के लिए श्री गौरी शंकर यानी श्री गौरीश्वर साधना करनी चाहिए.इसमें 21 दिन तक ‘ऊं नम: शिवाय’ मंत्र की 51 माला प्रतिदिन जाप करनी चाहिए. इन्द्रेश्वर शिवलिंग की आराधना का मंत्र है- ‘ऊं ह्रौं ह्रीं नम: शिवाय’.इस प्रकार जो साधक 32 माला जप के साथ 21 दिन तक साधना सम्पन्न करता है, उसके सभी पाप नष्ट हो जाते हैं.

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भूतबाधा, प्रेतबाधा और सभी प्रकार की तंत्र बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए श्री भूतेश्वर शिवलिंग की पूजा कर, ‘ऊं हीं ऐं नमो रुद्राय भूतानत्रसय ऊं फट्’ की 28 माला 28 दिन तक जप करना चाहिए. ओंकारेश्वर शिवलिंग की आराधना में ‘ऊं श्री मनोवांछितम देहि ऊं ऊं नम: शिवाय’ मंत्र का जप 32 दिनों तक करें. इस शिवलिंग को सिद्धेश्वर शिवलिंग की भी मान्यता है.इससे मनोरथ पूर्ण होते हैं. बृहस्पतेश्वर की आराधना का मंत्र है- ‘ऊं श्री नम: शिवाय ऊं श्री’.बृहस्पतेश्वर साधना में 28 दिन तक 51 माला प्रतिदिन जप करें. शारीरिक व्याधियों एवं सभी प्रकार के रोगों के निवारण के लिए पिंगलेश्वर शिवलिंग की स्थापना कर ‘ऊं हीं ग्लौं नम:’ मत्रं की 44 माला प्रतिदिन 28 दिन तक नियमित रूप से जप करना चाहिए.

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