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अाखिर हौसले की हुई जीत: 27 साल तक सिस्‍टम से लड़ता रहा 92 वर्ष का बुजुर्ग, मिला इंसाफ

देश को 31 साल तक सेवा देने वाले 92 वर्षीय आरके गुप्ता कान्टिब्यूटरी प्रॉविडेंट फंड (सीपीएफ) के बजाय पेंशन स्कीम का लाभ देने की मांग को लेकर 27 साल लड़ाई के बाद न्याय की जंग जीत गए हैं। 

लोकसभा कमेटी व हाई कोर्ट की एकल पीठ के बाद अब दो सदस्यीय खंडपीठ ने भी एनसीडीसी के पूर्व निदेशक आरके गुप्ता के हक में फैसला देते हुए कहा कि न सिर्फ उन्हें पेंशन की स्कीम को चुनने से वंचित रखा गया, बल्कि मई 1987 को जारी आदेश के तहत उनकी सीपीएफ स्कीम को पेंशन स्कीम में बदलने का लाभ भी उन्हें नहीं दिया गया। इसके खिलाफ उन्होंने 1991 में विभाग में शिकायत दर्ज कराई थी।

न्यायमूर्ति रेखा पल्ली व न्यायमूर्ति विपिन सांगी ने कहा कि भले ही आरके गुप्ता ने कोर्ट से संपर्क करने में देरी की हो, लेकिन उन्होंने लोकसभा कमेटी के सामने दावा किया था। ऐसे में यह नहीं कहा जा सकता कि वह अपने अधिकार पर दावा करने के लिए सोते रहे।

योग्यता होने के बावजूद उनको 20 साल तक पेंशन से वंचित रखा गया। पीठ ने कहा कि कोर्ट में देरी से आने के कारण वह पहले ही भारी नुकसान उठा चुके हैं, ऐसे में अब एकल पीठ के फैसले में हस्तक्षेप का कोई आधार नहीं है और कोल इंडिया की चुनौती याचिका खारिज की जाती है।

याचिका के अनुसार, आरके गुप्ता 1955 में बतौर सहायक कोयला अधीक्षक कोयला विभाग में भर्ती हुए थे। वर्ष 1956 में भारत सरकार ने कोल प्रोडक्शन एंड डेवलपमेंट कमिश्नर (सीपीडीसी) कार्यालय बनाया। इसे नेशनल कोल डेवलेपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनसीडीसी) को हस्तांतरित कर दिया गया।

इसमें केंद्रीय कर्मियों को सीपीएफ का लाभ दिया गया। कोल इंडिया लिमिटेड की याचिका के मुताबिक, आरके गुप्ता समेत 14 कर्मियों ने सीपीएफ स्कीम को चुना था न कि पेंशन स्कीम को।

 

लोकसभा कमेटी का दरवाजा खटखटाया

मार्च 1986 में एनसीडीसी के निदेशक पद से सेवानिवृत्त हुए आरके गुप्ता ने याचिका में कहा था कि सरकार ने कर्मचारियों को सीपीएफ से पेंशन स्कीम में स्विच करने के लिए 12 विकल्प दिए थे। विभाग से 1991 में उन्होंने शिकायत की।

कार्रवाई नहीं होने पर आठ साल बाद वह मार्च 2000 में लोकसभा कमेटी के सामने पहुंचे। उनका पक्ष सुनने के बाद कमेटी ने अगस्त 1985 में दिए गए अध्यादेश के तहत पेंशन स्कीम देने का आदेश दिया। इसके बावजूद कोल इंडिया लिमिटेड ने 2003 में उनके आवेदन को रद कर दिया।

इस पर आरके गुप्ता ने 2006 में हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी और एकल पीठ ने उन्हें पेंशन स्कीम का लाभ देने का आदेश दिया था। इस पर कोल इंडिया लिमिटेड ने हाई कोर्ट की दो सदस्यीय खंडपीठ के समक्ष चुनौती याचिका दाखिल की थी।

यह था एकल पीठ का फैसला

एकल पीठ ने आरके गुप्ता को निर्देश दिया था कि वह चार सप्ताह के अंदर कोल इंडिया को सीपीएफ की रकम 12 प्रतिशत ब्याज के साथ वापस करें। साथ ही कोल इंडिया को आदेश दिया कि वह आरके गुप्ता को याचिका दायर करने की तारीख से 12 प्रतिशत ब्याज के साथ पेंशन जारी करे और उनकी प्रतिमाह पेंशन की भी व्यवस्था करे।

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