आचार्य ने कहा कि आरबीआई बेशक अंतिम ऋणदाता की भूमिका निभाता है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है

 गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) क्षेत्र में नकदी के संकट के निदान के लिए बीते दो महीनों में कई उपाय किए गए हैं और इससे नकदी की किल्लत कुछ कम हुई है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने कहा है कि आरबीआई के लिए यह जरूरी नहीं है कि वो संकटग्रस्त क्षेत्र की सहायता को बतौर अंतिम उपाय आगे बढ़े।

यह उल्लेख करते हुए कि केंद्रीय बैंक वित्तीय प्रणाली में नकदी की समस्या के समाधान के सिद्धांतों के अनुसार काम करता है, आचार्य ने गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियों (एनबीएफसी) की समस्याओं के निदान के लिए किए गए उपायों को गिनाया। आचार्य ने केंद्रीय बैंक की पांचवीं द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद औपचारिक संवाददाता सम्मेलन में कहा, “आरबीआई बेशक अंतिम ऋणदाता की भूमिका निभाता है, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि इस तरह के कदमों के लिए परिस्थितियां है भी या नहीं। हमारा जो आकलन है उसमें फिलहाल इस प्रकार की जरूरत नहीं दिखाई देती है।”

आचार्य ने कहा कि अर्थव्यवस्था की अच्छी सेहत जहां कर्ज में वृद्धि मौजूदा बाजार मूल्य पर जीडीपी वृद्धि दर से ऊपर है और विभिन्न क्षेत्रों में इसका उपयुक्त वितरण भी है, जो कि आरबीआई को भरोसा दिलाता है कि किसी भी क्षेत्र के लिए इस प्रकार के विशेष समर्थन की जरूरत नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि आरबीआई ने विभिन्न कदमों के जरिए पूरी प्रणाली में कर्ज के लिए धन की उपलब्धता में इजाफा लाने का काम किया है। गौरतलब है कि बीते दिन खत्म हुई आरबीआई की एमपीसी बैठक में ब्याज दरों को अपरिवर्तित रखा गया है।

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