कुर्सी की लालच में दलितों को ही भूली दलित की बेटी

हिन्द न्यूज़ डेस्क| यूपी में होने वाले सियासी घमासान में हर पार्टी अपनी पूरी ताकत झोंक रही है. लेकिन इस सभी के बीच खुद को दलित की बेटी कहने वाली नेता मायावती ने चुनाव में जीत हासिल करने के लिए जातिगत कार्ड अपना खेल दिया है. लेकिन इन सभी के बीच ख़ास बात यह है कि इस बार दलितों को ही टिकट काट दिए गए हैं.

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बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने आने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों का जातिगत ब्योरा जारी किया है. एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, सुप्रीमो मायावती ने बताया कि पार्टी भी 403 सीटें पर चुनाव लड़ रही है. इसमें 106 सीटों पर ओबीसी और 87 सीटों पर दलित उम्मीदवार खड़े किए गए हैं. 97 उम्मीदवार मुस्लिम हैं. बसपा ने अगड़ी जातियों के उम्मीदवारों की 113 सीटें दी हैं- इसमें 66 ब्राह्मण, 36 राजपूत और 11 कायस्थ-वैश्य-पंजाबी समुदाय से हैं.

इससे पहले मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए मायावती ने कहा कि जनता मोदी सरकार से परेशान हो गई है. मायावती ने लखनऊ में संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को बताना चाहिए कि उन्हें नोटबंदी से क्या मिला? सरकार के नोटबंदी के फैसले से 90 फीसदी जनता को परेशानी हुई है जिससे कई लोगों की जानें गईं.

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लोगों को पहले की तरह पैसे निकालने की आजादी मिलनी चाहिए. मोदी सरकार ने बिना तैयारी के नोटबंदी का फैसला किया है. उन्होंने नोटबंदी के फैसले को आजाद भारत का काला अध्याय बताते हुए कहा कि अच्छे दिन के आसार बहुत कम दिख रहे हैं.

मायावती ने कहा कि उम्मीद है कि लोगों के खाते में 15 लाख रुपए आएंगे और उन्हें अपने पैसे खर्च करने की आजादी होगी.

मायावती ने सोमवार को लखनऊ में प्रधानमंत्री की रैली में उमड़ी भीड़ के बारे में कहा कि प्रधानमंत्री की रैली में भाड़े पर लोगों को लाया गया था. मोदी सरकार जनता का ध्यान नोटबंदी से हटाने पर लगी हुई है.

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