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केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि J&K में PDP ही नहीं नेशनल कांफ्रेंस के नेता भी PAAK की तरफदारी करते रहे हैं

 प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में राज्यमंत्री जिंतेंद्र सिंह (Jitendra Singh) ने जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला (Farooq Abdullah) के उस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है जिसमें उन्होंने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा सुलझाने के लिए पाकिस्तान से बात करने की पैरवी की थी। जितेंद्र सिंह ने सोमवार को समाचार कहा कि जम्मू-कश्मीर के कुछ नेता जब सत्ता में रहते हैं तो वे राज्य को भारत का अभिन्न अंग मानते हैं, लेकिन जैसी ही उनकी सत्ता चली जाती है, उन्हें जम्मू-कश्मीर का दुख दिखने लगता है और पाकिस्तान से बातचीत की पैरवी करने लगते हैं।

केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा कि जम्मू-कश्मीर में पीडीपी ही नहीं नेशनल कांफ्रेंस का भी इस तरह का चरित्र रहा है। उन्होंने कहा कि एक बार जब फारूक अब्दुल्ला प्रदेश के मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने शिकायत की थी कि पीओके में आतंकी कैंप चल रहे हैं। अब वे सत्ता में नहीं हैं तो उन्हें जम्मू-कश्मीर का दर्द दिख रहा है और पाकिस्तान से बातचीत की पैरवी कर रहे हैं।

फारूक अब्दुल्ला का जितेंद्र सिंह पर पलटवार
जितेंद्र सिंह के इस बयान पर फारूक अब्दुल्ला ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। अब्दुल्ला ने कहा कि ‘जितेंद्र सिंह कैसी बयानबाजी कर रहे हैं? उन्होंने अब तक जम्मू-कश्मीर में शांति बहाली के लिए किया ही क्या है। मंत्री पद संभालना और बात करना अलग बात है, लेकिन उन्हें कुछ करके दिखाना चाहिए। अब्दुल्ला ने कहा कि मैंने कब कहा कि मैं भारतीय नहीं हूं? जितेंद्र सिंह जैसे लोग पाकिस्तानी हैं। ये लोग झूठ बोलकर सत्ता में आए हैं’।  

फारूक अब्दुल्ला के इस बयान पर बढ़ा विवाद

इससे पहले रविवार को अजमेर आए फारूक अब्दुल्ला ने कहा था कि पाकिस्तान की इमरान खान सरकार से सलाह और समझौते के बिना जम्मू-कश्मीर का मसला सुलझाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा था कि जम्मू कश्मीर विधानसभा के चुनाव लोकसभा के साथ ही हों, जिससे की ट्यूरिस्ट स्टेट को नई सरकार मिले। वह अपना कामकाज तेज कर स्टेट में स्थिरता लाएं।

फारूक अब्दुल्ला रविवार को अजमेर ख्वाजा मोइनुद्दीन चिस्ती की दरगाह पर जियारत के लिए गए थे। उन्होंने यहां मीडिया से बातचीत करते हुए कहा था कि कश्मीर का मुद्दा राजनीतिक मुद्दा है, इसे मिल बैठकर ही सुलझाया जा सकता है, जब तक यह मुद्दा सुलझाया नहीं जाएगा, तब तक स्थिरता नहीं आएगी। मौजूदा केंद्र सरकार के रहते कभी जम्मू-कश्मीर में स्थिरता नहीं आ सकती। सरकार वार्ता के लिए तैयार होगी ही नहीं। आने वाले दिनों में महागठबंधन के नेतृत्व में मजबूत सरकार बनेगी जो इस मसले का हल करने का प्रयास करेगी। और यकीनन इस मसले हल निकलेगा।

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