गोरिल्ला, चिंपैंजी जैसे जीवों की हथेलियों पर इंसानों की तरह होती हैं रेखाएं

इंसानों की पहचान तो उनका चेहरा देखकर आसानी से हो जाती है, लेकिन बात अगर जानवरों की की हो तो आमतौर पर एक प्रजाति के ज्यादातर जानवर एक जैसे ही लगते हैं। कई बार उनके रंग और कद-काठी में इतनी समानता होती है कि उन्हें पहचानना कठिन हो जाता है। इसी के चलते बड़े पैमाने पर पशुपालन करने वाले लोग अपने पशुओं की पहचान के लिए अलग-अलग तरह के तरीके इस्तेमाल करते हैं।

कभी उनके शरीर पर कोई चिह्न गोद दिया जाता है तो कभी उनके कान में लटके लेबल या गले में लटकी रस्सी से उनकी पहचान होती है। लेकिन पशुओं के चोरी हो जाने की स्थिति में यह तरीका विफल हो सकता है। इसके साथ ही जंगल में रहने वाले जानवरों की पहचान के लिए भी यह तरीका कारगर नहीं है। ऐसे में प्रश्न उठता है कि क्या इंसानों की तरह जानवरों की पहचान के लिए भी फिंगरप्रिंट या अन्य वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता? इसका उत्तर हां है।

वैज्ञानिकों का कहना है कि गोरिल्ला, चिंपैंजी, ओरांगुटन (भूरे बालों वाला लंगूर) आदि की हथेलियों और तलवों पर इंसानों की तरह ही रेखाएं और पैटर्न बने होते हैं। इनकी मदद से उनकी पहचान की जा सकती है। अभी तक एक ही फिंगरप्रिंट के दो जानवर नहीं मिले हैं इसलिए उनकी पहचान के लिए यह तरीका भरोसेमंद माना जा रहा है।

अन्य जानवरों की हथेलियों पर भी मिले हैं प्रिंट

ऑस्ट्रेलिया में पाए जाने वाले जानवर कोआला की हथेलियों पर भी कई तरह के प्रिंट बने होते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह मानव की हथेलियों पर बने पैटर्न से थोड़ा अलग है। लेकिन इसके प्रिंट से दो अलगअलग कोआला की पहचान हो सकती है। नोजप्रिंट से हो सकती है।

कुत्तों की पहचान

कुत्तों की पहचान के लिए उनके विशेष नोजप्रिंट (नाक की छाप) का भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे संबंधित एक तकनीक का पेटेंट भी कराया जा चुका है। अभी हालांकि इस तरीके का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा।

धारियों से भी पहचान संभव

जेब्रा और कुछ जानवरों की पहचान उनके शरीर पर बनी धारियों से भी की जा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये धारियां दूर से देखने में एक जैसी लगती हैं लेकिन इनका पैटर्न भिन्न होता है। जेब्रा की सबसे बड़ी प्रजाति ‘ग्रेवी जेब्रा’ के शरीर पर बनी धारियों के पैटर्न का डाटा इकट्ठा किया गया है। इसी की मदद से पूर्वी अफ्रीका के जंगल में रह रहे हर ग्रेवी जेब्रा की निगरानी की जा रही है ताकि उन्हें संरक्षण दिया जा सके।

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