घरों में बंदर सड़क पर आवारा जानवर, जाएं तो जाएं कहां

कानपुर। सर्दियों के दिनों में घर की छत पर धूप में बैठना किसे नहीं अच्छा लगता। जरा सोचिए कि आप घर की छत पर बैठे धूप का आनंद ले रहे है और अचानक बंदरों का झुंड आप को घेर ले ऐसे में समझ में नहीं आता कि अब क्या करें। कई बार बच्चे तो बंदरों से डर कर भागने में गिरकर गंभीर रूप से जख्मी भी हो जाते हैं। वहीं दूसरी ओर जब आप सड़क पर निकलते हैं तो आवारा जानवर आपका रास्ता रोकर कर खड़े मिल जाएंगे। इनमें आवारा कुत्तों और गायों की संख्या सबसे ज्याद होती है। कई बार ये सड़क हादसों का सबब भी बन जाते हैं।

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कई की जानें ले चुके आवारा जानवर

सड़क पर घूम रहे आवारा जानवरों की वजह से कई लोगों को अपनी जान तक गंवानी पड़ी है। रात के अंधेरे में सड़क के बीचो बीच ये ऐसे बैठे रहते हैं, जैसे आप अपने घर के ड्राइंग रूम में बैठे हों। जरा सी असावधानी पर ये गंभीर हादसों का सबब बन जाते हैं। विजय नगर के रहने वाले रवि तिवारी ने बताया कि उनके बड़े भाई सब्जी मंडी से सब्जी लेकर पैदल घर आ रहे थे, तभी एक आवारा सांड़ ने उन्हें उठा कर पटक दिया उनकी इलाज के दौरान मौत हो गई। इसी तरह कल्याणपुर के सौरभ शुक्ला ऑफिस से लौट रहे थे, पनकी रोड पर अचानक एक गाय उनकी बाइक के सामने आ गई। सौरभ बाइक को नियंत्रित नहीं कर पाए और गाय से टकराकर रोड पर गिर गए। इस बीच पीछे से आ रहा ट्रैक्टर उनके पैरों के ऊपर से गजर गया और वो जीवन भर के लिए अपने पैरों से अपाहिज हो गए। ऐसे बहुत से हादसे हैं जिनमें या तो लोगों की जान ही चली गई या फिर वो जीवन भर के लिए विकलांग हो गए।

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सेंट्रल स्टेशन गए हैं तो बंदरों से रहें संभल कर

सेंट्रल स्टेशन पर ट्रेन पकड़ने गए हैं और हाथ में खाने का सामान है तो बंदरों से बचकर रहें। जरा सा चूके तो हाथ का सामान बंदरों के झुंड के बीच में दिखता है। यह नजारा स्टेशन पर रोज ही दिखता है। सेंट्रल स्टेशन के घंटाघर और कैंट साइड के प्लेटफार्म बंदरों के झुंड से पटे पड़े हैं। जीआरपी के सामने तो बंदरों की पूरी फौज ही दिखाई देती है। किसी भी यात्री का खाने का सामान छीन कर भाग जाना, आम बात हो गई है। खाद्य सामग्री पर झपंट्टा मारकर बंदर शेड पर भाग जाते हैं या फिर प्लेटफार्म पर ही झुंड के रूप में बैठ कर खाते हैं। इनके खौफ से न तो यात्री पास में जाते हैं न ही रेल कर्मी। पशु चिकित्साधिकारी डॉ. एके सिंह ने बताया कि आवारा जानवरों को पकड़ने का अभियान चलाया जा रहा है। प्रतिदिन 20 जानवर पकड़े जा रहे हैं। जल्द दो और वाहन खरीदे जा रहे हैं। गैंग का विस्तार किया जाएगा। जिसमें 20 कर्मी और शामिल किए जाएंगे, जिससे प्रतिदिन 50 जानवर पकड़े जा सकेंगे।

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