चावल निर्यात में आ रही है कमी के कारण सरकार उठाने जा रही हैं ये बड़ा कदम

पिछले पांच सालों में भारत विश्व का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश बन गया है. लेकिन इस चालू वर्ष में चावल के निर्यात में गिरावट आई है क्योंकि कीटनाशक के अधिक इस्तेमाल से भारत के चावल की क्वालिटी खराब होती जा रही है और इसलिए एक्सपोर्ट में गिरावट भी दर्ज हुई है. लेकिन अब शायद इन हालातों में सुधार हो सकता है.

अपेडा ने चावल में कीटनाशक के इस्तेमाल पर एक गाइडलाइन होनी चाहिए ऐसा एक प्रस्ताव कृषि मंत्रालय को सौंपा है. दरअसल, कीटनाशक के इस्तेमाल पर कोई नियंत्रण नहीं है. ये प्रस्ताव 15 दिन पहले एक पत्र के माध्यम से कृषि मंत्रालय को सौंपा गया है.

कृषि और प्रांसस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपेडा) के ताजा आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2018-19 के पहले तीन महीनों अप्रैल से जून के दौरान बासमती चावल के निर्यात में सात फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई है। हालांकि अपेडा गिरावट के आँकड़ों को मानने से इनकार कर रहा है. अपेडा बीईडीएफ के डायरेक्टर एके गुप्ता ने कहा कि भारत की लैब एक्सपोर्ट से पहले चावल की टेस्टिंग करे ऐसा अनिवार्य नहीं है, ये कंपनी और एक्सपोर्टर पर निर्भर होता है.

हां ये जरूर है कि आजकल किसान बगैर समझे और जागरूकता की कमी की वजह से कीटनाशक का खूब इस्तेमाल करते हैं इससे चावल की क्वालिटी पर असर होता है. लेकिन इसमें अपेडा की कोई भूमिका नहीं है. इसके पीछे पेस्टिसाइड का व्यापार करने वाली एक बड़ी लॉबी काम करती है. इसलिए हमने कीटनाशक का इस्तेमाल कैसे हो इसके लिए एक गाइडलाइन लाने का प्रस्ताव तैयार किया है ताकि जो लोग इसका यूज कर रहे हैं वो सावधान हो जाएं. 

चालू वर्ष में चावल निर्यात में आई कमी
भारत से लगभग 40 लाख टन बासमती चावल निर्यात होता है जबकि देश में 20 लाख टन चावल की खपत है. लेकिन जहरीले कीटनाशकों के प्रयोग के कारण निर्यात में लगातार कमी दर्ज की जा रही है. एपेडा के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2018-19 के पहले तीन महीनों में बासमती चावल का निर्यात घटकर 11.69 लाख टन का ही हुआ है जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में इसका निर्यात 12.58 लाख टन का हुआ था. पिछले दो साल में चावल एक्सपोर्ट में गिरावट आई है, यूरोप, अमेरिका, सऊदी अरब इन देशों में चावल के ज्यादा कंसाइनमेंट कैंसल होते दिख रहे हैं.

भारतीय चावल में पाए जाते हैं अधिक कीटनाशक
दरअसल, भारत में चावल की पैदावर के दौरान अधिक मात्रा में कीटनाशक और अन्य केमिकल टॉक्सिक का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिससे चावल की गुणवत्ता पर असर हो रहा है. विदेश में जब भारत से चावल जा रहे हैं तो उनमें पेस्टिसाइड और दूसरे केमिकल अधिक मात्रा में पाए जा रहे हैं इसलिए ज्यादातर कंसाइनमेंट शिपमेंट के दौरान ही रद्द हो जाते हैं. इस साल चावल एक्सपोर्ट में 10-15 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई है. जबकि भारत चावल के निर्यात में अव्वल नंबर पर आता है.

ऑल इंडिया राइस एक्पोटर्स एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार, भारत से हर साल 50 लाख मेट्रिक टन चावल विदेशों में निर्यात किया जाता है. ऐसे में अगर कीटनाशकों के अधिक इस्तेमाल के कारण चावल निर्यात नहीं होगा तो 18 से लेकर 20 लाख किसानों पर इसका सीधा असर पड़ेगा. इसी को देखते हुए भारत में निर्यात के सबसे बड़े सरकारी संगठन एपेडा ने किसानों को कम से कम कीटनाशकों के इस्तेमाल की सलाह देते हुए एडवाइजरी जारी की है.

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