टर्मिनल थ्री न होने से दिल्ली एयरपोर्ट मेट्रो में बाधा

नई दिल्ली:  सस्ती घरेलू विमान सेवाओं की उड़ानों का संचालन टर्मिनल थ्री से न होना दिल्ली मेट्रो की एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन के लिए एक बड़ी ‘बाधा’ रहा है. हालांकि इस प्रमुख कॉरीडोर में इस साल अगस्त में दैनिक यात्रियों की संख्या ने 50 हजार का आंकड़ा छूकर एक उपलब्धि हासिल की है लेकिन सिंह का कहना है कि यदि चीजें योजना के अनुरूप हुई होतीं तो यह संख्या कहीं ज्यादा होती.

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उन्होंने कहा कि जब 23 किलोमीटर लंबा गलियारा बन रहा था, तब ऐसी योजना थी कि घरेलू समेत तमाम उड़ानों का संचालन टी थ्री से हुआ करेगा. लेकिन ‘हमें नहीं पता’ कि क्यों अधिकारियों ने टर्मिनल 1 से संचालन जारी रखने का फैसला किया.

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सिंह ने बताया, ‘‘यह वाकई एक झटका है क्योंकि हमारा मानना है कि घरेलू विमान सेवाओं के जरिए सफर करने वाले लोग सार्वजनिक यातायात का इस्तेमाल करते हैं. टी थ्री के लोग अकसर अपने खुद के वाहनों में आते हैं. हालांकि हम दोनों टर्मिनल्स के बीच फीडर सेवा चला रहे हैं और इससे कुछ हद तक मदद मिली है.’’ उन्होंने कहा कि योजना के चरण में, यह भी सोचा गया था कि संपत्ति का विकास इस कॉरीडोर के लिए राजस्व का एक बड़ा स्रोत होगा लेकिन कम यात्रियों की संख्या इसके रास्ते में आ रही थी. इस वजह से मेट्रो को किराए घटाने पड़े.

सिंह ने कहा कि इसके पीछे का विचार यह था कि जब यात्रियों की संख्या बढ़ेगी तो संपत्ति का विकास भी होगा.बीते साल सितंबर में किराए 50 फीसदी कम किए गए थे ताकि तुलनात्मक रूप से महंगी लाइन को लोकप्रिय बनाया जा सके. यह लाइन नयी दिल्ली रेलवे स्टेशन को टी थ्री से जोड़ती है. अधिकतम किराए को वर्ष 2013 के 180 रूपए से घटाकर 60 रूपए कर दिया गया जबकि न्यूनतम किराए को 50 रूपए से घटाकर 10 रूपए कर दिया गया.

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उन्होंने कहा, ‘‘हमें एक बड़ा फायदा इसलिए मिला क्योंकि हम पहले से ही एक सिस्टम का संचालन कर रहे हैं. कई चीजें हम बेहद सरल तरीके से कर पाए. नियंत्रण केंद्र को यहां स्थानांतरित कर दिया गया. इसी तरह रखरखाव कर्मचारी साझा कर लिए गए.

जहां तक संचालन और रख रखाव के खर्च की बात है तो हम बहुत सी दक्षता ला पाए.’’ आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2013 में दैनिक तौर पर औसत यात्री संख्या 10,069 थी. मार्च 2014 में यह बढ़कर लगभग 12,000 हो गई. एक साल बाद यह बढ़कर 19,466 हो गई.28 अगस्त 2015 में 32,000 से ज्यादा लोगों ने इस लाइन पर सफर किया. इसके एक साल बाद इसमें यात्रियों की संख्या अब तक सबसे अधिक यानी 50,000 हो गई.

 

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