ट्रंप का ‘ट्रंपकार्ड’: अंतरराष्ट्रीय विरोध के बीच येरुशलम बनी इजरायली राजधानी

हिन्द न्यूज डेस्क| अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपना नया ट्रंपकार्ड खेल दिया है. उन्होंने इजरायली की राजधानी येरुशलम को बनाने के आदेश दिए हैं. इसे पहले तेल अवीव इस देश की राजधानी थी. इस कदम ने इजरायल को तो खुश कर दिया है. पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय इसका विरोध कर रहा है. हालांकि अधिकारीयों की मानें तो इस बदलाव में अभी 1 साल का समय लगेगा.

इजरायल

ट्रंप ने इसे शांति का कदम बताते हुए  वाइट हाउस में कहा है कि ये काम बहुत समय से रुका हुआ था. फिलिस्तीन से विवाद पर फिर भी येरुशलम पर इजरायल का ही अधिकार है. अब जाकर इसे पूरा जो जाना चाहिए. जबकि इस कदम के विरोधी इसे पश्चिम एशिया में हिंसा भड़काने वाला निर्णय मान रहे हैं. इस कदम का विरोध अरब देशों में जमकर हो रहा है. गाजा में अमेरिका और इजरायल के झंडे भी जलाए गए हैं.

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असल में 1995 में अमेरिकी कांग्रेस में एक प्रस्ताव पास किया गया था जिसमें दूतावास को यरुशलम में शिफ्ट करने की बात कही गई थी. हालांकि बाद में जो भी राष्ट्रपति सत्ता में आए, उन्होंने यथास्थिति बनाए रखी और इस प्रस्ताव पर अमल नहीं किया. वहीं ट्रंप ने सत्ता में आने से पहले चुनावी वादा कर लिया था कि वह दूतावास को शिफ्ट करवाएंगे.असल में ट्रंप को जो जनाधार मिला है उसमें इजरायल समर्थक वोटरों की बड़ी तादाद थी.

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इजरायल पूरे यरुशलम शहर को अपनी राजधानी बताता है जबकि फिलिस्तीनी पूर्वी यरुशलम को अपनी भावी राजधानी बताते हैं.असल में इस इलाके को इजरायल ने 1967 में अपने कब्जे में ले लिया था. इजरायल-फिलस्तीन विवाद की जड़ यह इलाका ही है. इस इलाके में यहूदी, मुस्लिम और ईसाई तीनों धर्मों के पवित्र स्थल हैं. यहां स्थित टेंपल माउंट जहां यहूदियों का सबसे पवित्र स्थल है, वहीं अल-अक्सा मस्जिद को मुसलमान बेहद पाक मानते हैं.

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