तो भाजपा नेताओं की मुस्कुराहट का अब समझ आया राज़

हल्द्वानी। विधानसभा चुनाव 2017 की आचार संहिता से पहले प्रदेश में भाजपा की इस बड़ी जनसभा में शाह कई मुद्दों पर छाए कोहरे को छांटने का काम भी कर सकते हैं। यूं तो साठ विधानसभाओं में हो चुकी परिवर्तन यात्रा ने प्रदेश भाजपा के नेतृत्व के आत्मविश्वास में इजाफा किया है। शाह अभी तक प्रदेश भाजपा का पूरा साथ भी देते आए हैं।

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शाह के हल्द्वानी पहुंचने से पहले परिवर्तन यात्रा की एक बड़ी लकीर भाजपा खींच ही चुकी है। नोट बंदी अभी तक भाजपा नेताओं के चेहरे पर मुस्कान का सबब है।

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कांग्रेस में एकमात्र हरीश रावत से टकराने की चुनौती से उपजी सहूलियत भी उनके खाते में है। नोटबंदी के साइड इफेक्ट को टटोलने और उत्तराखंड में चुनावी मुद्दों को खोजने में जुटी प्रदेश भाजपा को अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की जादू की झप्पी का इंतजार है। बुधवार को हल्द्वानी के एमबी इंटर कालेज के मैदान में जुटने वाली भीड़ के सामने उनका यह इंतजार भी खत्म होगा।

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शाह की सख्ती के चलते पार्टी के अंदरूनी झगड़ों के सतह पर न आने से प्रदेश में पार्टी की मुसीबत भी कम हुई है। कांग्रेस से आए नेताओं का पार्टी के रंग में ढल जाना भी अब सुकून देने वाला साबित हो रहा है। इतना होने पर भी भाजपा के सामने अब अपने चुनावी अभियान को गति देने की चुनौती है।

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देहरादून में यात्रा का शुभारंभ करने सहित तीसरी बार उत्तराखंड पहुंचकर शाह ने यह जता भी दिया है। इसके साथ ही 60 विधानसभाओं में से 43 विधानसभाओं में केंद्रीय मंत्रियों की उपस्थिति से शाह ने यह भी साफ कर दिया कि उनका फोकस कहां है।

इसके उलट कांग्रेस को सुविधा यह है कि मुख्यमंत्री हरीश रावत पूरी तरह से उत्तराखंड राज्य के विधानसभा चुनाव को ही समर्पित होंगे। इस सब मामलों से पार पाने के लिए अब प्रदेश भाजपा को शाह की जादू की झप्पी का इंतजार है। बुधवार को हल्द्वानी के एमबी कालेज के मैदान में प्रस्तावित जनसभा से यह भी तय होगा कि शाह इन सब मामलों में प्रदेश भाजपा को किस हद तक गले लगाएंगे।

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कांग्रेस अब अपने चुनावी अभियान को बृहस्पतिवार की काशीपुर रैली के बाद से धार देगी। इससे पार पाने की भी चुनौती भाजपा के सामने है। उत्तर प्रदेश, पंजाब सहित अन्य राज्यों में चुनाव अभियान शुरू होने पर केंद्रीय नेतृत्व का फोकस उत्तराखंड पर रहना भी मुश्किल होगा।

 

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