पंचायत चुनाव के दौरान सामने आया लाखों का घोटाला

मऊ। 2015 के यूपी में होने त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान आचार संहिता लगने के बाद भी बावजूद भी ब्लाक स्तर के एडीओ एडीओ पंचायत सेक्रेटरी और तत्कालिन ग्राम प्रधानो ने मिलीभगत करते हुए एक करोंड़ 74 लाख रुपये के सरकारी पैसे का गबन किया था जिसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने जांच के आदेश भी दिए थे. जाँच के मामले में प्रथम द्र्श्यता घोटाला का मामला प्रकाश में आया लेकिन कोई ठोस कार्यवायी नही हुई. हालाँकि इस मामले में एफआईआर दर्ज कराने के लिए जिले की गाँव बचाओ मोर्टा समिति के लोगो ने कलेक्ट्रेट में महीनों धरना-प्रदर्शन किया लेकिन उसके बाद भी कोई सुनावायी नही हुयी.

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गाँव के मोर्चा गाव मोर्चा बचाओ समिति के सदस्य ने बाल गोविन्द सिहं ने मामले में कोर्ट की शरण में गये तो कोर्ट ने दोहरीघाट थाने में एफआईआर दर्ज कराने का आदेश दिया. थाने कोर्ट के आदेश पर एफआईआर दर्ज कर दिया है जिसके बाद से अधिकारियो और इस घोटाले में शामिल लोगो में हड़कम्प मचा हुआ है।

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धोखाधड़ी का मुकदमा दोहरीघाट थाने की पुलिस ने दर्ज कर लिया है। इन पर पिछले ग्राम पंचायत चुनावों में आचार संहिता के दौरान अवैध तरीके से धन निकाल कर बंदरबांट करने के आरोप हैं। यह रकम गांवों में विकास कार्यों केलिए आई थी। डीएम द्वारा कराई गई जांच में इन ब्लाकों में घपले की पुष्टि हुई थी। सीजेएम कोर्ट में धारा 156 (3) के तहत आए आवेदन में सीजेएम नेपुलिस को जांच कर 16 दिसंबर तक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया था। लेकिन नियत तिथि से पूर्व ही पुलिस ने आरोपियों के विरुद्घ मुकदमा दर्ज करन्यायालय को रिपोर्ट सौंप दिया है।

 

ग्राम पंचायत चुनावों के दौरान एडीओ पंचायत को प्रशासक नियुक्त किया गयाथा। इस अवधि में एडीओ पंचायत , सेक्रेटरियों ने ग्राम प्रधानों और रोजगार सेवकों को मिलाकर अनधिकृत रूप से ग्राम निधियों से नाली ,खडंजा, हैंडपंपकी मरम्मत आदि के नाम पर लंबी रकम निकालकर गोलमाल कर लिया।शिकायत आने पर. तत्कालीन डीएम वैभव श्रीवास्तव ने प्रत्येक ब्लाकों में जांच अधिकारी नियुक्त कर प्रकरण की जांच कराया।

 

कोपागंज ब्लाक में विकास कार्यों के नाम पर निकाले गए 44 लाख 52 हजार 971रुपये का गोलमाल तत्कालिन जांच अधिकारी अपर जिलाधिकारी समीर वर्मा ने पकड़ा। उन्होंने अपनी आख्या में लिखा है कि 85 प्रतिशत रकम हैंडपंप मरम्मत मेंखर्च दिखाई गई है। इसी प्रकार दोहरीघाट ब्लाक में विकास कार्यों एक लाख 22 हजार रुपये छपरा धूसर और अहिरौली गांवों के विकास कार्यों के लिए निकाली गई।

 

दोहरीघाट ब्लाक में हुए विकास कार्यों में एक लाख 22 हजार का घपला जांच अधिकारी डीपीआरओ दिनेश प्रकाश शर्मा ने पकड़ा था। उन्होंने एडीओ पंचायत पारस वर्मा ,ग्राम पंचायत अधिकारी आद्या शंकर मिश्र और सेक्रेटरी श्रीनारायन राय के इसके लिए दोषी पाया था।

 

उधर कोपागंज ब्लाक की जांच एडीएम समीर वर्मा ने किया था। एडीएम ने कोपागंज ब्लाक के रइसा, मोलनापुर, रसूलपुर, फतेहपुर ताल नरजा, प्यारेपुर सलाउद्दीनपुर और मसीना सहित 15 गांवों में विकास कार्यों और हैंडपंपों की मरम्मत के मद में खर्च किए गए 44 लाख 52 हजार 971 रुपये का घपला पकड़ा था। इसके लिए एडीओ पंचायत, रइसा गावं के सेक्रेटरी शैलेंद्र सिंह प्रधान,रोजगार सेवक आदि को दोषी पाया था। रानीपुर ब्लाक के 15 गांवों में विकास कार्यों की जांच एसडीएम जगदंबा सिंह ने किया था।

 

इस ब्लाक के अमारी, धर्मसीपुर, सोनिसा, पलिगढ़, तेंदुली, दौलसेपुर, भौरेपुर, हाजीपुर, लोहाटिकट, चाल्हा और पिरुवा सहित 15 गांवों में 45 लाख 28 हजार 250 रुपये का भुगतान हुआ है।

 

एडीएम ने 13 जनवरी 2016 को अपनी रिपोर्ट डीएम को सौंपी थी। लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। केवल कुछ एडीओ पंचायतों और सेक्रेटरियों का कार्यक्षेत्र बदल दिया गया। इस बारे में गांव बचाओ मोर्चा के सदस्य बाल गोविंद सिंह ने सीजेएम कोर्ट में धारा156 (3) के तहत प्रार्थनापत्र देकर घपला करने वालों के विरुद्घ मुकदमा दर्ज करने की मांग किया। सीजेएम ने तीनों ब्लाकों के संबंधित थानाध्यक्षों को जांच कर 16दिसंबर तक आख्या देने का आदेश दिया था। जिसमें दोहरीघाट थाने एफआईआर दर्ज कर दिया है।

 

‘कोर्ट के आदेश पर धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर लिया गया है इसकी विवेचना होगी।‘

रविन्द्र सिहं (अपर पुलिस अधीक्षक मऊ)

रिपोर्ट- अभिषेक राय

 

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