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मोती के हार की तरह पिरोया गया मुलायम कुनबा, चचा भतीजे की खींचतान में टूट सा रहा

HUMA ALAM

humaalam1234@gmail.com

समाजवादी पार्टी का कुनबा चुनावी मौके पर इस तरह के गृह कलह में फंसा है क्या वाकई ये गृह कलह है या महज सुर्खियों में बने रहने का तरीका। समाजवादी कुनबा पिछले 25 सालों से मुलायम परिवार के कंधों के सहारे खड़ा था लेकिन अब इस तरह का पारिवारिक झगड़ा क्या मुलायम सिंह की 25 साल की मेहनत को ज़ाया कर देगा। वो कुनबा जिसे मुलायम ने मोती की तरह पिरो कर रखा था। वही पार्टी अब चचा भतीजे की लड़ाई में कमजोर बन जायेगी क्या ये सवाल ज़हन में आना तो जरूरीshivpal-akhilesh-1477029274

यूपी विधानसभा चुनाव 2017 का आग़ाज़ हो गया है लेकिन ये क्या सपा की अंतर्कलह तो रुकने का नाम ही नही ले रही। सपा के इस पारिवारिक विवाद से तो यही जाहिर होता है कि सपा की राजनीति इस बार परिवार का वार ही है। चचा शिवपाल और भतीजे अखिलेश के मनमुटाव ने पार्टी को तार तार कर दिया है जिसकी वजह से कुनबा दो खेमें में बट गया है कभी अखिलेश के समर्थकों का जमावड़ा लगता है तो कभी शिवपाल के समर्थक कोहराम काटते हैं लेकिन वहीं देखा जाये तो अखिलेश के पक्ष में खड़े रहने वाले और सपा के बड़े रणनीतिकार माने जाने वाले प्रोफेसर रामगोपाल यादव सहित तमाम सपा नेताओं को शिवपाल यादव ने बाहर का रास्ता दिखा दिया तो मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने चचा शिवपाल और उनके करीबी मंत्रियों को अपने मंत्रिमंडल से बर्खास्त करके पारिवारिक जंग को और हवा देने का काम किया। इससे पता चलता है कि अखिलेश ने भी अपने कार्यकाल में लोगों के दिलों में जगह बना ली है इसी वजह से अखिलेश के समर्थकों की संख्या ज्यादा नजर आ रही है और साथ ही पार्टी में भी सीएम अखिलेश के समर्थक ज्यादा हैं।

लड़ाई इतनी घातक होती नजर आ रही है कि समाजवादी पार्टी के कार्यक्रम में भी इसकी झलक नजर आयी चाहें वो हाल ही में हुई रथ यात्रा हो या सपा का रजत जयंती समारोह कोई भी इससे अछूता नहीं रह गया। इन दोनों जगहों पर चाचा भतीजे की तकरार साफ नजर आयी। दोनों एक दूसरे पर तंज कसते नजर आये। दोनों ने एक दूसरे पर अपने अपने भाषणों के दौरान एक दूसरे पर छींटा कशी भी की। शिवपाल ने जब अपने भाषण में कहा ‘उनसे कितना त्याग लिया जायेगा’ शि‌वपाल ने जैसे ही अखिलेश को यूपी का लोकप्रिय मुख्यमंत्री कहा, पंडाल में युवाओं की नारेबाजी शुरू हो गई। शिवपाल ने गुस्से में कहा, मुझे मुख्यमंत्री नहीं बनना, कभी नहीं बनना। चाहे मेरा जितना अपमान कर लेना। बर्खास्त कर लेना। खून माँगेंगे तो दूँगा। वहीं इस भाषण के जवाब अखिलेश ने भी अपने भाषण में तंज कसते हुए कहा कि ‘किसी को परीक्षा लेनी है तो मैं देने के लिए तैयार हूं। उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपी एक मंत्री पर तंज कसते हुए कहा कि तलवार तो देते हो पर उसे चलाने का अधिकार नहीं देते। वहीं डॉ. राममनोहर लोहिया का उद्धरण देते हुआ कहा, ‘कुछ लोग सुनेंगे जरूर पर समाजवादी पार्टी का सब बिगड़ने के बाद।’ चचा भतीजे का जब एक दूसरे ने निशाना साध कर तीर चला दिया तो बारी आयी सपा सुप्रीमों मुलायम सिंह यादव की वो भला इन सबसे कैसे दूर रह सकते थे उन्होने भी लिया माइक और शुरू  हो गये उन्होंने जमीनों पर कब्जा करने वाले सपा नेताओं की जरूर क्लास लगाई। बात महागठबंधन की भी चली लेकिन यह कैसे खड़ा हो सकता है इसका खाका किसी के पास नहीं था। खैर मुलायम परिवार वाद का मुद्दा वाकई में एक परिवार वाद है या सिर्फ वोट पाने के लिये की गयी साजिश ये भी जल्द ही पता लग जायेगा। बहरहाल मुलायम परिवार में इतना घमासान होने के बावजूद पार्टी टूटने की नौबत नही आयेगी क्योंकि इस कलह से साबित हो गया है कि मुलायम ही इसके मुखिया हैं और इनके अलावा कोई भी कुछ नही कर सकता।

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