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फास्ट फूड कंपनियों के सामने चीन ने टेके घुटने, सरकार की पोषण नीति की हुई दुर्गति

‘हैप्पी 10 मिनट्स’ यह चीन सरकार के अभियान का स्लोगन है। इस अभियान के तहत सरकार स्कूली बच्चों को रोजाना कम से कम 10 मिनट व्यायाम करने के लिए प्रोत्साहित करती है। बच्चों में महामारी की तरह बढ़ते मोटापे की समस्या ने सरकार को इस तरह के अभियान चलाने के लिए मजबूर किया है।

पोषण नीति में नहीं है कैलोरी वाले जंक फूड से परहेज का कोई जिक्र

हाल में एक रिपोर्ट में चीन सरकार के इस तरह के अभियानों और पोषण नीति को लेकर चौंकाने वाली बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, विभिन्न शीतल पेय और फास्ट फूड कंपनियों का सरकार में इस कदर दखल है कि पोषण नीति में भी उनके हितों का पूरा ध्यान रखा जाता है। मोटापे से निजात के लिए चीन सरकार व्यायाम और शारीरिक श्रम को बढ़ावा देने की पहल तो करती है, लेकिन उसकी किसी पहल में खानपान पर नियंत्रण का जिक्र नहीं होता।

सरकार अपने अभियान में ज्यादा कैलोरी वाले फास्ट फूड या चीनी से बने शीतल पेय पीने से परहेज करने को नहीं कहती है। जानकारों का कहना है कि खानपान और कैलोरी पर नियंत्रण के बिना अकेले व्यायाम मोटापे से बचाने में मददगार नहीं हो सकता। सरकार इस कदर कंपनियों के प्रभाव में है कि अपनी नीति में इसका जिक्र ही नहीं करती।

भारत समेत कई देशों में हैं सक्रिय

अध्ययन के मुताबिक, कोका कोला और अन्य बहुराष्ट्रीय फास्ट फूड कंपनियां इंटरनेशनल लाइफ साइंसेज इंस्टीट्यूट (आइएलएसआइ) के माध्यम से अपने काम को अंजाम देती हैं। चीन ही नहीं भारत, मेक्सिको, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील जैसी उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों में भी आइएलएसआइ वैज्ञानिकों, सरकारी अधिकारियों और फास्ट फूड कंपनियों के बीच की कड़ी की तरह काम करती है।

कोका कोला ने कुछ साल पहले ग्लोबल एनर्जी बैलेंस नेटवर्क नाम के गैर-लाभकारी संगठन के जरिये अमेरिका में इसी तरह नीतियों को प्रभावित करने का प्रयास किया था। 2015 में व्यापक विरोध के बाद कंपनी ने इस संगठन को भंग कर दिया था।

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