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बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए यूएई ने भारत के तेल भंडारों में अधिक तेल रखने की भी इच्छा जाहिर की

दुनिया का तीसरे सबसे बड़े ऊर्जा उपभोक्ता और तेल संपन्न देश संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) ने सोमवार को कहा कि वह भारत में रिफाइनरी और पेट्रोरसायन क्षेत्र में निवेश बढ़ाना चाहता है। तेल की लगातार बढ़ती मांग को ध्यान में रखते हुए यूएई ने भारत के तेल भंडारों में अधिक तेल रखने की भी इच्छा जाहिर की।

यूएई की अबु धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) और इसकी भागीदार सऊदी आराम्को ने महाराष्ट्र के रत्नागिरी में प्रस्तावित 44 अरब डालर की रिफाइनरी एवं पेट्रोरसायन परियोजना में 50 फीसद हिस्सेदारी ली है। एडीएनओसी ने कर्नाटक के मंगलूर और पादुर में बने रणनीतिक भूमिगत तेल भंडारगृहों में भी अपना तेल रखने की पहल की है।

यूएई के राज्य मंत्री और एडीएनओसी के सीईओ सुल्तान अहमद अल-जबर ने भारत में निवेश बढ़ाने की इच्छा जताते हुए कहा, “हम विशेषतौर से भारत में रिफाइनिंग और पेट्रोरसायन क्षेत्र में अपना निवेश बढ़ाने पर गौर कर रहे हैं।” मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा कि यूएई केवल भारत को कच्चा तेल बेचने वाला देश बनकर नहीं रहना चाहता है बल्कि अपने रिश्ते को रणनीतिक भागीदारी में पहुंचाना चाहता है। उन्होंने कहा, “भारत केवल हमारे लिए एक महत्वपूर्ण बाजार ही नहीं है बल्कि एक अहम रणनीतिक भागीदार भी है।”

डा. सुल्तान अहमद अल-जबर यहां पेट्रोटेक 2019 सम्मेलन में भाग लेने पहुंचे हैं। डा. सुल्तान अहम से जब यह पूछा गया कि रत्नागिरी में प्रस्तावित छह करोड़ टन की रिफाइनरी में उनकी कंपनी एडीएनओसी कितनी हिस्सेदारी खरीदेगी तो जवाब में उन्होंने कहा, “हम अभी शुरुआती दौर में हैं। परियोजना का स्वरूप तय किया जा रहा है। हम अपने भागीदारी सऊदी आरमको और भारतीय पक्ष के साथ इस बारे में काम कर रहे हैं।” 

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