बिल्डर के दिवालिया होने पर नहीं डूबेगी खरीदारों की रकम

घर खरीदारों को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने इन्सॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कोड (आइबीसी) में संशोधन वाले कानून को सही ठहराते हुए घर खरीदारों को वित्तीय कर्जदाता का मिला दर्जा बरकरार रखा है। इसका मतलब यह है कि अगर कोई रियल एस्टेट कंपनी खुद को दिवालिया घोषित करती या होती है, तो उसकी संपत्ति की नीलामी से हासिल रकम में घर खरीददारों को भी हिस्सा मिलेगा।

आइबीसी में संशोधन कायम रहने से मकान ग्राहकों को भी कंपनी के फाइनेंशियल क्रेडिटर्स यानी वित्तीय कर्जदाता के बराबर का दर्जा बरकरार रहेगा। यानी घर खरीदने वालों की अहमियत बिल्डर को लोन देने वाले बैंकों के बराबर होगी। इस कानून के खिलाफ 180 से ज्यादा रियल एस्टेट कंपनियों ने कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। स्पष्ट किया है कि जहां कहीं भी रियल एस्टेट रेगुलेटरी एक्ट यानी रेरा और आइबीसी की किन्हीं धाराओं में आपसी विवाद की स्थिति पैदा होगी, वहां आइबीसी के नियम मान्य होंगे।

अब यह होगा: अब मकान खरीदारों को प्रोजेक्ट पूरा न होने की स्थिति में राहत मिलेगी। ऐसे मामलों में उन्हें दिए गए बैंकों के बराबर अधिकार बरकरार रखा गया है। कोर्ट के फैसले के बाद घर खरीदार भी किसी बिल्डर के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया की मांग कर सकते हैं। न्यायमूर्ति आरएफ नरीमन ने कहा कि इस संशोधन से मकान ग्राहकों को एक और प्लेटफॉर्म मिला है, जहां वे रियल एस्टेट कंपनियों के खिलाफ अपनी मुश्किलें रख सकते हैं। हालांकि बेंच ने कहा कि केवल वास्तविक खरीदार ही बिल्डर के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया की मांग कर सकता है।

कई कंपनियों में फंसा है पैसा

देशभर में कई रियल एस्टेट कंपनियां ऐसी हैं जिन्होंने लोगों को मकान देने का वादा तो किया, लेकिन बीच राह में हाथ खड़े कर दिए। ऐसी कंपनियां खुद को नुकसान में बताकर दिवालिया घोषित हो गईं। ऐसी स्थिति में कंपनियों और उनके मालिकों की संपत्तियां जब्त की जाती हैं। पहले जब्त की गई संपत्ति का पूरा पैसा बैंकों को मिलता था, लेकिन अब घर खरीदने वाले लोगों को भी इसमें से हिस्सा दिया जाएगा। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने रियल एस्टेट कंपनी आम्रपाली के ग्राहकों को बड़ी राहत दी थी। कोर्ट ने आम्रपाली मामले में फैसला सुनाया है कि अब एनबीसीसी घर बनाकर देगी।

सरकार को निर्देश

सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार को भी सुधार के उपायों पर एक हलफनामा दायर करने को कहा है। सरकार को यह निर्देश भी दिया गया है कि वह ‘नेशनल कंपनी लॉ टिब्यूनल’ व अपील टिब्यूनल की खाली पद जल्द भरे, ताकि काम सही ढंग से हो सके।

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