बुध ग्रह के रहस्यों पर से पर्दा उठाने को तैयार है यूरोप का अंतरिक्ष यान

 दुनिया भर के वैज्ञानिक दूसरे ग्रहों पर जीवन के संकेतों की तलाश में जुटे हुए हैं। इसी कड़ी में ब्रिटेन की अंतरिक्ष एजेंसी भी एक अहम मिशन शुरू करने की तैयारी में है। दरअसल, ब्रिटेन में निर्मित एक अंतरिक्ष यान बुध ग्रह के रहस्यों को सुलझाने के लिए इसी सप्ताह लांच किया जाएगा। यह अपनी तरह का पहला मिशन है, जो यह पता लगाएगा कि सूर्य के इस निकटतम ग्रह पर पानी मौजूद है या नहीं।

द यूरोपियन स्पेस एजेंसी (ईएसए) के बेपिकोलंबो अभियान के तहत दो कृत्रिम उपग्रह प्रक्षेपित किए जाने हैं। ये उस गर्म ग्रह के बारे में पता लगाएंगे, जिसकी सतह का तापमान 450 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है। ब्रिटेन की लीसेस्टर यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर एमा बुंस के मुताबिक, बुध के बारे में ऐसी कई दिलचस्प बातें हैं, जिन्हें हम अभी भी समझ नहीं पाए हैं। एमा ने उम्मीद जताई है कि इस मिशन से कई जानकारियां निकलकर सामने आएंगी। इससे यह पता चल सकेगा कि इस ग्रह पर पानी है या नहीं।

यह है ग्रह की खासियत

सूर्य के बेहद पास होने के बावजूद बुध के झुकाव के कारण इसका बहुत सा हिस्सा स्थायी रूप से छाया में रहता है। इसके परिणाम स्वरूप तापमान शून्य से नीचे 180 डिग्री सेल्सियस तक गिर जाता है, जिससे यहां बर्फ जम सकती है। ग्रह पर पानी के अलावा वैज्ञानिक बुध के चुंबकीय क्षेत्र के बारे में कुछ अहम जानकारियां प्राप्त करना चाहते हैं। अभी तक माना जाता था कि इस ग्रह पर सब कुछ ठोस है, लेकिन पिछले कुछ अभियानों से चुंबकीय क्षेत्र के जरिये पता चला कि इसके आंतरिक भाग में कुछ पिघली हुई चीज भी है।

अतीत के मिशन

बता दें कि अभी तक बुध ग्रह पर केवल दो अंतरिक्ष यान जा चुके हैं। इनमें से एक नासा के मैरिनर 10 था, जो 1974 और 1975 में इसके रहस्य सुलझाने गया था, वहीं इसके बाद 2011 और 2015 में नासा का ही मेसेंजर भी यहां गया था।

मिली थीं अहम जानकारियां

एमा के मुताबिक, मेसेंजर से हमें कई अहम जानकारियां मिलीं, लेकिन इसी के साथ कई सवाल भी खड़े हो गए थे। इन्हीं को सुलझाने के लिए नया मिशन लांच किया जाएगा।

2025 में पहुंचेगा बुध तक

ब्रिटिश एजेंसी का कहना है कि फ्रेंच गुआना स्थित कोउरोउ में यूरोपियन स्पेसपोर्ट से 20 अक्टूबर को लांच किया जाएगा, जिसे बुध तक पहुंचने में सात साल का समय लगेगा और 2025 में वहां पहुंचेगा।

कहीं खींच न ले सूर्य

वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह अंतरिक्ष यान 5.2 अरब मील की यात्रा करेगा। पृथ्वी से छोड़े जाने के बाद शुक्र और बुध ग्रह इस यान की मदद करेंगे, जिससे यह सूर्य के गुरुत्वाकर्षण से खींचे जाने से बच सकेगा। 

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