भगवान गणेश की पूजा में क्यों वर्जित होता है तुलसी का उपयोग, जानें पूरी कथा

हिन्द न्यूज़ डेस्क|  मार्गशीर्ष माह की शुक्ल पक्ष की चतुर्थी पर विनायक चतुर्थी का पर्व मनाया जा रहा है. भविष्य पुराण, चतुवर्ग चिंतामणि व कृत्य-कल्पतरु शास्त्रों में इसे गणेश चतुर्थी कहा जाता है. ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भगवान गणेश को चतुर्थी का स्वामी कहा जाता है. विनायक चतुर्थी का पर्व हर माह दिन के हिसाब से मनाया जाता है. विनायक चतुर्थी के दिन भगवान गणेश की पूजा की जाती है, लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि भगवान गणेश को तुलसी नहीं चढ़ाई जाती और ना ही उनकी पूजा सामग्री में तुलसी को शामिल किया जाता है. इसके पीछे एक पौराणिक कथा है, जो आज हम आपको बताने जा रहे हैं.

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कथा के अनुसार माना जाता है कि भगवान गणेश गंगा नदी के किनारे तपस्या कर रहे थे और वहीं तुलसी घूम रही थीं. भगवान गणेश को देखकर तुलसी उनकी ओर आकर्षित हो गईं और उन्हें अपना पति बनाने का सोच लिया. लेकिन गणेश जी उस वक्त तपस्या में लीन थे तो तुलसी ने अपने दिल की बात कहने के लिए उनका ध्यान भंग कर दिया.

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जब भगवान गणेश का ध्यान भंग हो गया तो तुलसी ने उन्हें अपने दिल की बात बताई. तुलसी की बात सुनकर गणेश जी ने बड़ी शालीनता से उनके प्रस्‍ताव को अस्‍वीकार कर दिया. गणेश जी ने तुलसी से कहा कि वो उस लड़की से शादी करेंगे, जिसके गुण उनकी माता पार्वती से मिलेंगे.

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