मार्ग निर्माण में राजनीति, सपा नेता को ठेका देना इंजीनियरों पर पड़ा भारी

भाजपा सरकार में भी नियमों को ताक पर रखकर सड़क निर्माण का ठेका सपा नेता को देना लोक निर्माण विभाग के इंजीनियरों पर भारी पड़ गया है। दरअसल, इस मामले ने राजनैतिक रूप ले लिया है। इसके कारण अब तक इसमें एक एक्सईएन, एक सहायक अभियंता व एक अवर अभियंता निलंबित हो चुके हैं। अभी इस अनियमितता में उच्चाधिकारियों पर भी गाज गिर सकती है।

मेजारोड से खीरी तक 32 किमी सड़क निर्माण का मामला 

यमुनापार के मेजा क्षेत्र के मेजारोड से खीरी तक 32 किमी सड़क निर्माण कराया गया। इसमें 21 किमी तक का टेंडर किया गया, जबकि 11 किमी सड़क का निर्माण बिना टेंडर के ही करा दिया गया। इस 11 किमी की सड़क को बनाने का ठेका सपा के एक नेता को दे दिया गया। सपा नेता अपनी पार्टी के सांसद के बेहद करीबी भी बताए जाते हैं। मामले ने इसी वजह से तूल भी पकड़ा।

नियम विरुद्ध बिना टेंडर के सड़क बनाने का दिया गया कार्य 

दरअसल, सपा नेता को भाजपा की सरकार में सारे नियमों को ताक पर रखकर बिना टेंडर के सड़क बनाने का काम दे दिया गया। यही नहीं उसका भुगतान भी कर दिया। भुगतान की प्रक्रिया में भी अनियमितता की गई। 21 किमी सड़क बनाने वाले ठेकेदार की फर्म पर ही 11 किमी सड़क के निर्माण का भुगतान कर दिया गया, जो विभाग के नियमों के विपरीत है। इस गड़बड़ी में उच्चाधिकारी और कर्मचारी भी जांच की जद में हैं।

भाजपा नेताओं ने लखनऊ तक की अनियमितता की शिकायत 

भाजपा विधायक और बड़े पदाधिकारियों को इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने लखनऊ तक यह बात पहुंचा दी। इसके बाद उच्चस्तरीय जांच कमेटी गठित कर दी गई। चीफ इंजीनियर मीरजापुर और दूसरे खंड के अधिशासी अभियंता एके द्विवेदी को जांच सौंप दी गई। अधीक्षण अभियंता एसके श्रीवास्तव ने इसकी चार्जशीट भी तैयार कर शासन को भेज दी। गुरुवार को अधिशासी अभियंता आरबी राम, सहायक अभियंता बीपी यादव को निलंबित कर दिया गया, जबकि इससे पहले अवर अभियंता महेंद्र सिंह पर निलंबन की कार्रवाई हुई थी। इसके अलावा तीन सहायक अभियंताओं बृज बिहारी सिंह, अनिल कुमार सिंह और विनोद कुमार तिवारी को स्थानांतरित कर दिया गया।

बोले अधीक्षण अभियंता 

अधीक्षण अभियंता एसके श्रीवास्तव कहते हैं कि बिना टेंडर के सड़क का निर्माण कराने और नियमों को ताक पर रखकर उसका भुगतान करा देने के मामले में अभी जांच चल रही है। पूरी रिपोर्ट जल्द ही जांच अधिकारी मुख्य अभियंता मीरजापुर के माध्यम से शासन को भेजी जाएगी।

पहले हुआ टेंडर कर दिया निरस्त

इस 11 किमी सड़क निर्माण का टेंडर निकाला गया था, मगर बाद में उसे निरस्त कर दिया गया। दरअसल, सपा नेता को ठेका देने के लिए ऐसा किया गया था। यही नहीं अब सड़क के बन जाने और भुगतान हो जाने और इंजीनियरों पर कार्रवाई हो जाने के बाद इस सड़क का टेंडर निकाला गया है। टेंडर खोलने की तिथि 20 जुलाई तय की गई है।

कौशांबी में तैनात जेई का कारनामा

लोक निर्माण विभाग में कौशांबी में तैनात एक अवर अभियंता के कारनामे की इन दिनों जोरों पर चर्चा है। कहा जा रहा है कि मुख्य अभियंता कार्यालय में तैनात इसी जेई ने सपा सांसद के करीबी नेता को ठेका दिलाने व भुगतान कराने में दबाव बनाया था। एक बड़े अफसर के साथ रहने तथा ऊंची पकड़ होने के कारण इस जेई ने मनमाने तरीके से ठेका दिला दिया। हालांकि यह अवर अभियंता भी जांच के दायरे में आ चुका है। अधीक्षण अभियंता का कहना है कि जेई की भूमिका की भी जांच कराई जा रही है।

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