मिस्त्री-वाडिया का साथ छोड़ना इनकी छवि पर पड़ा भारी

हिन्द न्यूज़ डेस्क-  आपको बता दे की देश के बड़े उद्योगपति रतन टाटा ने टाटा कंपनी के पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री और नुस्ली वाडिया के खिलाफ अब चुप्पी तोड़ दी है और केमिकल्स के शेयरधारकों की बैठक में अपने विचार रखने के लिए हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा, ‘पिछले दो माह के दौरान, मेरी व्यक्तिगत छवि और साख को नुकसान पहुंचाने के लिये प्रयास किये गये।

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उल्लेखनीय है कि मिस्त्री खुद को हटाए जाने के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं और शुरू में समूह की अन्य कारोबारी कंपनियों के निदेशक मंडल में बने रहने पर अड़े रहे। इस दौरान टाटा व मिस्त्री के की जुबानी जंग हुई और दैनिक आधार पर एक दूसरे के खिलाफ बयान जारी किए गए।

वहीँ टाटा ने कहा, ‘यह समूह 150 साल से है. यह कंपनी संचालन व समान अवसर पर आधारित है। मुझे लगता है कि सच्‍चाई सामने आएगी जो भी प्रक्रिया हो, जितनी भी पीड़ादायी प्रक्रिया हो.’ टाटा कैमिकल्स के बोर्ड की असाधारण आम बैठक मिस्त्री व उनके समर्थक स्वतंत्र निदेशक  वाडिया को निदेशक मंडल से हटाने के प्रस्ताव पर विचार के लिए बुलाई गई थी। चूंकि मिस्त्री पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं इसलिए शेयरधारकों ने केवल वाडिया के बिंदु पर मतदान किया.

रतन टाटा ने कहा यह भी कहा कि ‘ये दिन बहुत ही अकेलेपन वाले रहे हैं क्योंकि अखबार उन हमलों से भरे हुए हैं जिनमें से ज्यादा निराधार लेकिन बहुत पीड़ादायक हैं।’

मिस्त्री टाटा समूह के निदेशक मंडल से तो हट गए हैं लेकिन उन्होंने रतन टाटा व टाटा संस को राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण में घसीटा है। वहीँ वाडिया ने रतन टाटा व कुछ निदेशकों के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज करावाया है। वाडिया का आरोप है कि टाटा समूह की तीन कंपनियों से उन्हें हटाने के लिए जो विशेष प्रस्ताव लाए गए, उसमें उनके खिलाफ कथित तौर पर अपमानजनक टिप्पणी की गई।

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