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 रुद्रप्रयाग :केदारनाथ से उदक कुंड का पवित्र जल अब घर ला सकेंगे श्रद्धालु

केदारनाथ आपदा में अमृत कुंड के बाद अब उदक कुंड को भी उसके वास्तविक स्वरूप में लाने के लिए कार्य किया जा रहा है। इस कुंड को स्थानीय पत्थरों से भव्य व सुरक्षित बनाया जा रहा है। जल्द ही धाम पहुंचने वाले श्रद्धालु कुंड के जल से आचमन करेंगे और अपने घर भी ले जा सकेंगे।
केदारनाथ के कुंडों का जल अमृत जैसा पवित्र माना जाता है। 16/17 जून 2013 की आपदा में मंदिर के आसपास के पांचों कुंड मलबे में दब गए थे। वर्ष 2014 में मंदिर के पीछे स्थित अमृत और मंदिर मार्ग पर उदक कुंड को खोजा जा चुका है, लेकिन शेष तीन कुंडों का सुराग नहीं मिल पाया है। इधर, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) द्वारा बीते दो माह से उदक कुंड का मास्टर प्लान के तहत पुनरुद्धार किया जा रहा है। इसे संरक्षित व सुरक्षित करने के साथ भव्य रूप दिया जा रहा है। लगभग चार फीट गहरे और 10 फीट चौड़े इस कुंड पर आपदा में बिखरे बोल्डरों से तैयार किए जा रहे पत्थर लगाए जा रहे हैं। जल्द ही श्रद्धालु इसके जल का उपयोग कर सकेंगे। केदारनाथ आपदा में अमृत कुंड के बाद अब उदक कुंड दक कुंड की मान्यता
यह कुंड मंदिर से करीब एक सौ मीटर पहले स्थित है। मान्यता है कि मंदिर के अंदर शिवलिंग को चढ़ाया गया जल इस कुंड में एकत्रित होता है। यह जल अमृत के समान पवित्र माना जाता है और श्रद्धालु इसे प्रसाद के रूप में अपने घरों के लिए लाते हैं। मान्यता है कि मृत्यु के समय यदि व्यक्ति के गले में इस पवित्र जल को डाला जाए तो वह आवागमन के चक्र से मुक्त हो जाता है।
कोट
प्रशासन द्वारा आपदा से पूर्व के प्राचीन सभी कुंडों का पुनरुद्धार मास्टर प्लान के तहत किया जा रहा है। भू-वैज्ञानिकों की मदद से हंस, रेतस और हवन कुंड की खोजबीन भी जल्द की जाएगी। – एनपी जमलोकी, कार्याधिकारी बीकेटीसी।

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