सरकार कर रही गोल्ड सेक्टर में नई जान फूंकने की तैयारी,

 सरकार देश के प्रमुख गोल्ड बाजारों के सर्वेक्षण की तैयारी कर रही है। इसके लिए सरकार ने नीति आयोग को एक विस्तृत योजना बनाने को कहा है। दरअसल, सरकार देश के विकास और रोजगार में गोल्ड सेक्टर की भागीदारी बढ़ाने के लिए इसमें नई जान फूंकना चाहती है। सरकार की मंशा है कि ज्वैलर्स से लेकर कारीगर और श्रमिक तक की स्थिति में सुधार लाया जाए और इस फिल्ड को अधिक आकर्षक बनाया जाए।

नीति आयोग इसके लिए जल्द ही देश के प्रमुख गोल्ड बाजारों का सर्वेक्षण करेगा। ‘रोजगार संभावनाओं का आकलन और भारत के गोल्ड मार्केट में कर्मचारियों की स्थिति’ नाम से होने वाले इस सर्वे के लिए दिल्ली, जयपुर, मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, कोयंबटूर व कोच्चि जैसे शहरों को चुना गया है, जहां गोल्ड का काम बड़े स्तर पर होता है।

यह सर्वेक्षण नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ लेबर इकोनॉमिक्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट (एनआइएलईआरडी) द्वारा किया जाएगा, जो नीति आयोग के अंतर्गत आता है। इसके लिए एनआइएलईआरडी ने ब्यूरो ऑफ रिसर्च ऑन इंडस्ट्री एंड इकोनॉमिक्स फंडामेंटल्स (बीआरआइइएफ) से डाटा संग्रह के लिए करार किया है। इस सर्वे में गोल्ड मार्केट का विकास, खनन, निर्माण और खुदरा बिक्री से जुड़े कर्मचारियों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति के साथ वस्तु एवं सेवा कर (जीडीपी) व उत्पाद शुल्क को लेकर ज्वैलर्स से सवाल किए जाएंगे।

इस बारे में एनआइएलईआरडी के निदेशक डॉ. पूर्ण चंद परिदा ने कहा कि इस सर्वे में गोल्ड सेक्टर के हर मुद्दे को छूने की कोशिश होगी। 15 से 20 दिनों तक यह सर्वे चलेगा। इसे लेकर एनआइएलईआरडी ने दिल्ली के आभूषण बाजार से संपर्क साधा है। केंद्र सरकार के इस मुहिम का स्वागत करते हुए द बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन कूचा महाजनी के अध्यक्ष योगेश सिंघल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले कार्यकाल में ज्वेलर्स के साथ एक सम्मेलन में देश के विकास व रोजगार के मामले में इस क्षेत्र को प्रचुर संभावनाओं वाला बताया था। उन्होंने कहा कि अभी भी आभूषण उद्योग देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में इसकी हिस्सेदारी सात फीसद है तो वस्तु निर्यात में 14 फीसद है। वहीं यह क्षेत्र 50 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार देता है। इसमें अगले दो से तीन वर्षों में 30 लाख नए रोजगार जोड़ने की प्रचुर संभावनाएं हैं। हालांकि, टैक्स संबंधी व्यावहारिक दिक्कतों से यह क्षेत्र जूझ रहा है, जिसे दूर किए जाने की आवश्यकता है।

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