सशस्त्र झंडा दिवस के पूरे हुए 68 साल, सैनिकों का कल्याण है मकसद

हिन्द न्यूज डेस्क| आज सशस्त्र झंडा दिवस है. 1949 में शुरू हुई इस परंपरा आज 68 साल बाद भी बदस्तूर जारी है. इस दिन का मकसद सेना के प्रति आभार जताना है. इस दिन देशवासियों कीओर से सशस्त्र सेना के कर्मचारियों और उनके कल्याण के लिए धन इकट्ठा करने की कोशिश की जाती है.

 सशस्त्र

शुरू-शुरू में इसे झंडा दिवस के रूप में सेलिब्रेट किया जाता था. पर 1993 में इसका नाम बदल कर सशस्त्र सेना झंडा दिवस कर दिया गया.इस दिन सिर्फ और सिर्फ सेना के कल्याण की योजनाओं पर काम करना होता है. इस ख़ास तौर पर झंडे की खरीद से इकट्ठा हुए धन शहीद  सैनिकों के परिवार के भले के लिए खर्च किया जाता है.

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सशस्त्र सेना झंडा दिवस द्वारा इकट्ठा की गई राशि युद्ध वीरांगनाओं, सैनिकों की विधवाओं, भूतपूर्व सैनिक, युद्ध में अपंग हुए सैनिकों व उनके परिवार के कल्याण पर खर्च करती है. आजादी के बाद सरकार को लगने लगा कि सैनिकों के परिवार वालों की भी जरूरतों का ख्याल रखने की आवश्यकता है और इसलिए सरकार ने 7 दिसंबर को झंडा दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया.

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