साइबरों ठगी के शिकार व्यक्ति के खाते का से निकाले गए 45 हजार रुपये को लेकर जिला उपभोक्ता फोरम ने बैंक को दोषी पाते हुए निकाली गई रकम लौटाने के निर्देश दिए

साइबरों ठगों द्वारा एक व्यक्ति के खाते का डाटा हैक कर निकाले गए 45 हजार रुपये को लेकर दाखिल वाद में जिला उपभोक्ता फोरम ने फर्जी ट्रांजेक्शन के लिए बैंक को दोषी पाते हुए निकाली गई रकम लौटाने के निर्देश दिए हैं। फोरम ने मानसिक क्षति के रूप में दस हजार व वाद व्यय के रूप में तीन हजार रुपये का भी भुगतान वादी को करने के निर्देश बैंक को दिए हैं।

ईश मोहन नेगी निवासी दून एनक्लेव सेवलाकलां ने पंजाब नेशनल बैंक की राजा रोड शाखा के खिलाफ जिला उपभोक्ता फोरम में वाद दायर किया था। वाद के मुताबिक ईश मोहन का खाता पीएनबी में है। बैंक से वादी को एक क्रेडिट कार्ड भी दिया गया था।  

21 जुलाई 2013 को उनके खाते से साइबरों ठगों ने दस बार में 45 हजार रुपये निकाल लिए थे। जानकारी मिलने के बाद वादी ने तुरंत इसकी जानकारी बैंक को दी और अपना क्रेडिट कार्ड बंद करवा दिया। साथ ही बैंक  के निर्देश पर पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराकर एफआइआर की प्रति, ट्रांजेक्शन डिस्प्यूट फॉर्म बैंक को भेज दी। 

बैंक ने उन्हें आश्वासन दिया कि आइटी विभाग द्वारा जांच की जाएगी। इसमें साठ से नब्बे दिन का समय लगेगा। जांच के आधार पर उनके खाते से निकाली गई रकम वापस कर दी जाएगी। इसके बाद वादी की ओर से कई बार बैंक से संपर्क किया गया, लेकिन अंत में बैंक प्रबंधक ने कहा कि पैसे उनकी गलती से निकले हैं। इसलिए बैंक उनकी कोई मदद नहीं करेगा।

इसके बाद वादी ने जिला उपभोक्ता फोरम में वाद दायर कर न्याय की गुहार लगाई। वाद दायर होने के बाद फोरम में बैंक से स्पष्टीकरण मांगा तो बैंक ने कहा कि इसमें बैंक की कोई गलती नहीं है। उपभोक्ता के गलतियों की वजह से ही उनके खाते से पैसे निकले हैं। 

दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत किए गए जवाब और साक्ष्यों के आधार पर फोरम में इसे बैंक की गलती करार दिया। फोरम ने कहा कि बैंक अपने क्रेडिट कार्ड की सुरक्षा नहीं कर पाया। इसलिए साइबर ठगों ने क्रेडिट कार्ड का डाटा हैक कर रकम निकाल ली।  

फोरम के अध्यक्ष भूपेद्र सिंह दुग्ताल ने सदस्य विमल प्रकाश नैथानी और अलका नेगी की मौजूदगी में वाद पर अंतिम सुनवाई करते हुए बैंक को 50,105 रुपये का भुगतान करने के साथ ही मानसिक क्षति के रूप में दस हजार और वाद व्यय के रूप में तीन हजार रुपये का भी भुगतान करने के निर्देश दिए। भुगतान तीस दिन के अंदर करने के निर्देश दिए गए हैं।

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