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सिंगल ब्रांड रिटेल में स्थानीय खरीद के नियम में ढील देने पर केंद्रीय मंत्रिमंडल करेगा विचार

 सिंगल ब्रांड रिटेल में विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआइ) के लिए 30 फीसद स्थानीय खरीद की शर्त में ढील देने के एक प्रस्ताव पर केंद्रीय मंत्रिमंडल जल्दी ही विचार कर सकती है। सूत्रों के अनुसार इस नियम के अनुपालन के लिए विदेशी सिंगल ब्रांड रिटेल कंपनियों जैसे एपल और आइकिया को ज्यादा समय मिल सकता है।

एक सूत्र ने बताया कि इसके संबंध में आर्थिक मामलों के विभाग समेत विभिन्न मंत्रलयों की राय जानने के लिए वाणिज्य व उद्योग मंत्रलय ने कैबिनेट ड्राफ्ट नोट जारी किया है। मंत्रलयों के सुझाव मिलने के बाद मंत्रलय जल्दी ही इस प्रस्ताव को विचार के लिए कैबिनेट के समक्ष रखेगा। आइफोन निर्माता एपल जैसी बड़ी कंपनियों को भारत में निवेश के लिए आकर्षित करने को इस प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है।

अगर कोई कंपनी 20 करोड़ डॉलर (1400 करोड़ रुपये) से ज्यादा एफडीआइ लाती है तो उसे पारंपरिक रिटेल स्टोर खोलने से पहले ऑनलाइन स्टोर खोलने की अनुमति दी जा सकती है। लेकिन कंपनियों को ऑनलाइन बिक्री शुरू करने के दो साल के भीतर रिटेल स्टोर खोलने होंगे। अभी इन कंपनियों को पहले रिटेल स्टोर खोलने के बाद ही ऑनलाइन बिक्री शुरू करने की अनुमति है। ऐसी कंपनियों के लिए 30 फीसद स्थानीय खरीद करने की शर्त है। यह शर्त पूरी करने के लिए पांच साल का वक्त दिया गया है। लेकिन इस नियम में राहत के तौर पर उन्हें इसे लागू करने के लिए छह से दस साल का वक्त दिया जा सकता है। कंपनियां अपने ग्लोबल कारोबार के लिए भारत से खरीद बढ़ाकर भी यह शर्त पूरी कर सकती हैं।

यह मोहलत भी एफडीआइ की रकम पर आधारित होगी। छह साल का वक्त उन कंपनियों को मिलेगा जो 10 करोड़ डॉलर (700 करोड़ रुपये) निवेश भारत में करेंगी। 20 करोड़ और 30 करोड़ डॉलर निवेश करने वाली कंपनियों को क्रमश: आठ और दस साल का वक्त मिलेगा। सरकार ने पिछले साल जनवरी में सिंगल ब्रांड रिटेल सेक्टर में 100 फीसद एफडीआइ की अनुमति दी थी। ऐसी कंपनियां सरकार से बिना अनुमति लिए देश में स्टोर खोल सकती हैं। अब सरकार उन्हें स्थानीय खरीद के नियम में रियायत देने पर विचार कर सकती है। एपल ने 2016 में इस नियम से रियायत की मांग की थी। चालू वित्त वर्ष में अप्रैल से सितंबर के बीच देश में एफडीआइ 11 फीसद घटकर 22.66 अरब डॉलर रह गया।

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