सीलिंग पर मनोज के कदम से संकट में भाजपा, आज सर्वोच्च न्यायालय में होगी पेशी

दिल्ली में सीलिंग के मुद्दे पर प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी अकेले पड़ गए हैं। पूर्वांचल रैली में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की चुप्पी के बाद इस बात को बल मिला कि केंद्र सरकार सीलिंग के मामले में सर्वोच्च न्यायालय की नाराजगी मोल नहीं लेना चाहती। उधर, मनोज तिवारी की आज सर्वोच्च न्यायालय में पेशी है। अदालत डेयरी की सील तोड़ने पर क्या रुख अपनाती है, उसी पर भाजपा की आगामी रणनीति तय होगी।

दिल्ली में वर्तमान में सीलिंग एक बड़ा मुद्दा है। कांग्रेस के इस मुद्दे पर बाजी मारने पर भाजपा में चिंता व्याप्त थी। मनोज तिवारी ने एक कदम आगे बढ़ कर डेयरी की सील तोड़ दी। भाजपा में चल रही गुटबाजी के चलते तिवारी पहले ही अकेले पड़ रहे थे, क्योंकि प्रदेश स्तर पर उनके साथ किसी ने भी कदम नहीं बढ़ाया। उधर, सर्वोच्च न्यायालय ने उन्हें तलब भी कर लिया।  पूर्वांचल रैली में मनोज तिवारी ने अमित शाह के समक्ष सीलिंग का मामला उठा दिया, ताकि शाह के बोलते ही सभी नेता उनके साथ जुड़ जाएं। लेकिन हुआ इसके उलटा,  शाह ने चुप्पी साध ली तो फिर वे भाजपा में विरोधी धड़े के निशाने पर आ गए।   

मनोज के कदम से संकट में भाजपा
भाजपा के वरिष्ठ नेताओं का मानना है कि तिवारी ने उत्साह में आकर जो कदम उठाया है, उससे पूरी प्रदेश भाजपा के समक्ष संकट खड़ा कर दिया है। भले ही तिवारी ने अदालत के समक्ष निगम अधिकारियों के भ्रष्टाचार का पर्दाफाश करने का तर्क रखा है, लेकिन निगम में भाजपा सत्तारूढ़ है। ऐसे में निगम में भ्रष्टाचार है तो यह भी भाजपा की विफलता को दर्शाता है।

सीलिंग के मामले में मनोज तिवारी की मंगलवार को कोर्ट में पेशी है। अब देखना है कि अदालत सील तोड़ने के मुद्दे पर क्या रुख अपनाती है। यदि अदालत के रवैये को देख मनोज तिवारी अदालत से माफी मांग ली या अदालत ने उनके खिलाफ टिप्पणी कर कार्रवाई कर दी तो भाजपा का दाव उल्टा पड़ जाएगा। इससे व्यापारियों, दुकानदारों के अलावा विपक्ष के निशाने पर भी भाजपा आ जाएगी। इसका खामियाजा पूरी भाजपा को भुगतना पड़ सकता है। 

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