सुप्रीम कोर्ट से आम्रपाली समूह की कॉमर्शियल प्रॉपर्टी की नीलामी का तात्कालिक फायदा निवेशकों को नहीं मिलने वाला है

सुप्रीम कोर्ट से आम्रपाली समूह की कॉमर्शियल प्रॉपर्टी की नीलामी का तात्कालिक फायदा निवेशकों को नहीं मिलने वाला है। आम्रपाली पर प्राधिकरण और बैंकों का हजारों करोड़ रुपया बकाया है। कॉमर्शियल प्रॉपर्टी बिकने के बाद प्राधिकरण व बैंक सबसे पहले बकाया वसूलने की कोशिश करेंगे। निवेशकों के हक में सिर्फ 200 से 250 करोड़ रुपये ही आ पाएंगे। इससे 46 हजार निवेशकों को आशियान दिला पाना संभव नहीं होगा। यही कारण है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी निवेशकों में खुशी का माहौल नहीं है। निवेशकों का कहना है कि प्राधिकरण और बैंकों को उनके हित में अपनी वसूली कम करनी चाहिए। इसमें हस्तक्षेप से ही निवेशकों को कोई रास्ता निकलने की उम्मीद है।

आम्रपाली समूह ने निवेशकों का पैसा अन्य कंपनियों में किया था ट्रांसफर

आम्रपाली समूह के निदेशकों को निवेशकों का पैसा अन्य कंपनियों में ट्रांसफर करना भारी पड़ गया। अदालत ने आम्रपाली के पांच सितारा होटल, एफएमसीजी कंपनी, कारपोरेट आफिस और मॉल जब्त करने का आदेश दिया है।

बिजनेस विस्तार में निवेशको की रकम इधर-उधर की गई

 

आम्रपाली समूह ने फ्लैट देने के नाम पर खरीदारों से जो रकम एकत्र की थी, उसका कई अन्य कंपनियों के जरिये इस्तेमाल किया गया। अदालत में दाखिल आम्रपाली के हलफनामे के मुताबिक नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कंपनी के 170 से ज्यादा टावर हैं, जहां 46,000 से ज्यादा लोगों ने घर बुक कराए हैं। समूह की अलग-अलग 15 कंपनियों ने इन्हीं के नाम पर फ्लैट खरीदारों से 11,573 करोड़ लिए। वहीं,  मार्केट और एफडीआइ से 4,040 करोड़ हासिल किए थे। इसमें से 10,300 करोड़ हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पर खर्च किए गए, जबकि करीब 3000 करोड़ रुपये की रकम बिजनेस विस्तार पर खर्च की गई थी।

आम्रपाली समूह ने जिन परियोजना में लगे पैसों को ट्रांसफर किया, उसमें स्मार्ट सिटी देव, सेंचुरियन पार्क, ड्रीम वैली, लेजर वैली, सिलिकन वैली और जोडियक देव का नाम शामिल है। फोरेंसिक आडिट के दौरान कई शेल कंपनियों का भी पता चला है, जिनकी जांच की जा रही है। इनमें से एक कंपनी के नाम पर आम्रपाली ने 1040 करोड़ खरीदारों से लिए लेकिन मकान बनाने की जगह 600 करोड़ रुपये दूसरी जगह इन्वेस्ट कर दिए।

नीलाम होने वाले 16 प्रोजेक्ट

  • आम्रपाली होम्स, वृंदावन
  • आम्रपाली होम्स प्रोजेक्ट इंदौर
  •  आम्रपाली होम्स भुवनेश्वर
  •  संगम कॉलोनाइजर जयपुर
  •  हाईटेक सिटी जयपुर
  •  अल्ट्रा होम्स कंस्ट्रक्शन सिक्किम
  • अल्ट्रा होम्स कंस्ट्रक्शन उदयपुर
  •  अल्ट्रा होम्स कंस्ट्रक्शन रायपुर
  •  अल्ट्रा होम्स कंस्ट्रक्शन न्यू रायपुर
  •  अनलॉन्च पार्ट लेजर वैली ग्रेनो वेस्ट
  •  अनलॉन्च पार्ट वैली कॉमर्शियल ग्रेनो वेस्ट
  •  अनलॉन्च पार्ट सेंचुरियन पार्क ग्रेनो वेस्ट
  •  अनलॉन्च पार्ट सेंचुरियन पार्क कॉमर्शियल ग्रेनो वेस्ट
  •  अनलॉन्च पार्ट गोल्फ होम्स ग्रेनो वेस्ट
  •  अनलॉन्च पार्ट सिलिकॉन सिटी नोएडा 

बता दें कि आम्रपाली ग्रुप की 20 परियोजनाओं में नोएडा-ग्रेटर नोएडा के करीब 45 हजार खरीदारों ने पैसा लगा रखा है। अब तक परियोजनाओं के तहत बनने वाले फ्लैटों में खरीदारों को कब्जा मिल जाना चाहिए था, लेकिन अधिकाश परियोजनाओं में खरीदारों को आशियाना नहीं मिल सका है। ऐसे में पता चला कि नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का ही चार हजार करोड़ रुपये आम्रपाली ग्रुप पर बकाया चल रहा है।

मजबूरन खरीदारों को उनका आशियाना दिलाने के लिए 2500 खरीदारों के साथ नेफोवा को कोर्ट की शरण में जाना पड़ा। नेफोवा संस्थापक इंद्रिश गुप्ता ने बताया कि अधिकाश परियोजनाओं में 2007 से 2010 के बीच बुकिंग हुई है। बुकिंग के दौरान परियोजना 10 से 20 प्रतिशत तक पैसा लिया गया। इसके बाद खरीदार अब तक फ्लैटों का 90 से 95 प्रतिशत पैसा जमा कर चुके हैं। करीब आठ साल इंतजार के बाद भी खरीदार को अपना आशियना नहीं मिल सका। नेफोवा अध्यक्ष अभिषेक ने बताया कि प्रदर्शन के बाद भी जब सुनवाई नहीं हुई तो शहर के विभिन्न थानों में धोखाधड़ी के एवज में मुकदमा दर्ज कराया गया।

इसमें कोतवाली बिसरख, सेक्टर-58, 49, 39 में आम्रपाली के खिलाफ कई दर्जन मुकदमे दर्ज हैं। यहां से काम नहीं चलने व कार्रवाई नहीं होने पर आम्रपाली के करीब 2500 खरीदारों ने सर्वोच्च न्यायालय का सहारा लिया। खरीदार दीपाकर कुमार ने बताया कि आम्रपाली ग्रुप ने घर का सपना दिखाया, लेकिन बदले में पैसा लेने के बावजूद घर नहीं दिया गया। आज का फैसला बेइमान बिल्डरों के लिए बड़ी सीख है। खरीदार केके कौशल का कहना है कि आम्रपाली की तमाम संपत्तियों की नीलामी होनी चाहिए।

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