होली के पहले निकलने वाली दारागंज की मुगदर बरात मुगल और अंग्रेजी शासनकाल से चली आ रही परंपरा में शामिल है

 ‘फाल्गुन’ का उत्कृष्ट पखवारा अर्थात ‘होलाष्टक लग्न’ लोगों को मदमस्त किए है। होली का कुछ ऐसा ही उत्साह व उल्लास नजर आता है दारागंज से निकलने वाली मुगदर बरात में। सदियों पुरानी यह परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी भव्यता प्राप्त कर रही है। हिंदुओं की एकता का पर्याय बन चुकी मुगदर बरात आज भी परंपरा संजोए है। इसके जरिए लोग सामाजिक बुराइयों का नाश करने का संकल्प लेते हैं।

मुगल व अंग्रेजी शासनकाल में हिंदुओं को संगठित करने को बरात निकलती थी

शक्ति का प्रतीक मुगदर भगवान भैरव बाबा का दंड है। प्रयागराज ऐसा शहर है, जहां मुगदर की बरात धूमधाम से निकाली जाती है। मुगल व अंग्रेजी शासनकाल में हिंदुओं को संगठित करने को बरात निकलती थी। तब होली के दिन मुहल्ले के लोग मुगदर लेकर कीर्तन बरात निकालते थे। एक व्यक्ति मुगदर लेकर घर-घर जाकर लोगों को बाहर निकलने की अपील करता था। पीछे चलने वाली टोली कीर्तन करती थी। अंग्रेजों के शासनकाल में स्वतंत्रता संग्राम सेनानी भोला नाथ चकहा, सीताराम ‘गुंठे’, नटेस शास्त्री के नेतृत्व में मुगदर की बरात पारंपरिक तरीके से निकलती थी। देश को आजादी मिलने के बाद स्व. राजाराम शास्त्री, स्वामी शिवमंगल दास, आचार्य लड़ाई पहलवान, बचई पहलवान, राम अवतार पांडेय ‘खडिय़ा पंडित’, सुरेंद्र श्रीवास्तव ‘लाला’ मुगदर बरात की परंपरा को आगे बढ़ाते रहे।

2001 में भव्यता प्रदान की गई
धकाधक संस्थान व प्रयागराज सेवा समिति की ओर से धर्मराज पांडेय, तीर्थराज पांडेय के संयोजन में बरात को 2001 में भव्यता प्रदान की गई। होली से पांच दिन पहले बैंडबाजा, ध्वज-पताका के साथ बरात निकालने की शुरुआत हुई।

20 किलो के मुगदर की प्रतिदिन होती है पूजा
जिस मुगदर की बरात निकलती है उसका वजन 20 किलो से ज्यादा है। कृष्णा राव के आवास पर प्रतिदिन सुबह-शाम मंत्रोच्चार के बीच इसका पूजन होता है। छोटे मुगदर महानिर्वाणी अखाड़ा, हनुमान मंदिर, वेणी माधव मंदिर, ललई पहलवान, सुरेंद्र लाला, पं. रामावतार पांडेय, खडिय़ा पंडित के घर से लाया जाता है।हल्दी देकर देते हैं बुलौव्वा
मुगदर बरात निकलने के पांच दिन पहले घर-घर जाकर बुलौव्वा दिया जाता है। आयोजन से जुड़े लोग हल्दी व निमंत्रण पत्र देकर बरात में शामिल होने का आमंत्रण देते हैं।

‘मद्रासी मुगदर’ के बराती बने सैकड़ों नर-नारी

होली के उल्लास व उमंग का प्रतीक मुगदर बरात शनिवार की रात दारागंज में धूमधाम से निकाली गई। धकाधक संस्थान व प्रयागराज सेवा समिति ने वैभव के साथ ‘मद्रासी मुगदर’ की बरात निकाली, जिसके साक्षी बने सैकड़ों नर-नारी। समिति कार्यालय पर नारियल, नींबू की बलि देकर मुगदरों को रथ में विराजमान कराया गया। इसके बाद बैंड-बाजा, गदा, फरसा आदि को लेकर बरात निकाली। विभिन्न मार्गों से होते हुए बरात निराला चौराहा पहुंची, वहां आसपास से आए पहलवानों ने एक लाख 51 हजार इनामी मुगदर को भांजा। पहलवानों को 151 बार मुगदर भांजना था, लेकिन कोई मानक के अनुसार मुगदर नहीं भांज पाया। 

अजहर मसूद, चीनी राष्‍ट्रपति व पाकिस्‍तानी पीएम का फूंका पुतला

अंत में अजहर मसूद, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान को आतंकवाद का प्रतीक मानते हुए उनके पोस्टरों को कुचला गया। इस दौरान कवि सम्मेलन का भी आयोजन किया गया। कवियों ने पुलवामा में शहीद हुए जवानों व न्यूजीलैंड की मस्जिद में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए अपनी रचनाएं पढ़ीं। इसमें चिरकुट इलाहाबादी, शकील फूलपुरी ने रचनाएं पढ़ी। कार्यक्रम में कवियों, पहलवानों व विशिष्टजनों को शगुन गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। संयोजन तीर्थराज पांडेय ने किया। कार्यक्रम में पूर्व मंत्री डॉ. नरेंद्र सिंह गौर, विधायक हर्षवर्धन बाजपेई, अंजनी सिंह, फूलचंद्र दुबे, कुल्लू यादव, भक्तराज पांडेय, धर्मराज पांडेय मौजूद रहे। संचालन डॉ. शंभूनाथ त्रिपाठी ने किया। 
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