स्लीप डिसऑर्डर: शरीर के लिए दवा की तरह है नींद

हिन्द न्यूज डेस्क|सोने के लिए आजकल के समय अलग से समय निकालना पड़ता है. ये समय निकलना जितना मुश्किल है, जिंदगी उतनी ही मुश्किल हो जाएगी अगर जरूरत भर की नींद ना ली जाए तो. नींद लम्बे समय तक पूरी नहीं हुई तो शारीरिक के साथ मानसिक दिक्कतें भी घेर लेती हैं.  स्लीप डिसऑर्डर मानसिक दिक्कटन के साथ मोटापे को भी बढ़ावा देता है.क्लिनिकल सायकोलोजिस्ट डॉ. आराधना गुप्ता कहती हैं, ज्यादा समय तक नींद ना पूरी होने का नतीजा मधुमेह, हाई ब्लड प्रेशर और मोटापा भी होता है. बेहद कब्ज रहना भी इसके असर का ही परिणाम होता हो. स्लीप डिसऑर्डर की वजह से याददाश्त भी कमजोर होती है.

स्लीप डिसऑर्डर

 

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स्लीप डिसऑर्डर है तो इसके लक्षण कई तरह से सामने आते हैं. जैसे बिस्तर पर जाने के काफी देर बाद नींद आना, दिन में नींद के झटके आते रहना, बार-बार नींद का टूटना, रात में बार-बार उठना, खर्राटे लेना, रातों में टांगों का छटपटाना, नींद में बोलना, चलना, हरकतें करना आदि.

साधारण दिखते असाधारण कारण-

सबसे पहले तो चिंता, इसका बड़ा कारण है. इसके अलावा परेशानी के बारे में सोचते रहने और मानसिक असुरक्षा नींद से नाता तोड़ने की बड़ी वजह बनते हैं. डॉ आराधना कहती हैं, हिडेन स्ट्रेस यानी छुपा हुआ तनाव भी नींद में खलल डालने का बड़ा काम करता है. इसको एक उदाहरण के तौर पर समझना होगा.

जैसे मान लीजिए कि आपके पर्स में 2000 के 10 नोट हैं, आप मार्केट गईं और 8 नोट खर्च कर दिए. फिर घर आकर आपने नोट गिने तो अब आपके पास सिर्फ 4000 रुपए ही थे. आपको अचानक से बढ़ते खर्चे की चिंता हुई. पर फिर आपने खुद को समझाया कि खरीदादी करेंगे तो खर्चा तो होगा ही. बात यहीं खत्म हो गयी. पर यह आपके दिल में कहीं घर कर गई और अचेतन मन में यह चिंता चलती रही. इसे ही हिडेन स्ट्रेस कहते हैं. पर हां, स्लीप डिसऑर्डर की वजहें और भी हैं-

  • देर से खाना खाना
  • अकेलापन
  • घंटों भूखे रहना
  • इंटरनेट, टीवी का इस्तेमाल ज्यादा करना
  • चाय और कॉफ़ी का ज्यादा सेवन
  • दिन भर कुछ भी ना करना
  • शराब, सिगरेट का लती होना
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