39 की आयु 31 का राज, जानिए विवेकानंद की कम उम्र में मौत की वजह

हिन्द न्यूज़ डेस्कजिस समय जिस काम के लिए प्रतिज्ञा करो, ठीक उसी समय पर उसे करना ही चाहिये, नहीं तो लोगो का विश्वास उठ जाता है. 

यह जीवन अल्पकालीन है, संसार की विलासिता क्षणिक है, लेकिन जो दुसरो के लिए जीते है, वे वास्तव में जीते है.

ऐसे विचारों से दुनिया के युवाओं के मार्गदर्शक की मात्र 39 वर्ष की आयु में एकदम से मौत हो जाती है. इस मौत का कारण शायद किसी को पता भी ना होगा. देश का एक ऐसा युवा जो हर किसी के लिए मशाल  बन चुका था, आज अचानक से सभी को छोड़ कर चला गया.

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स्वामी विवेकानंद का नाम लेने से ही मन में श्रद्धा और स्फूर्ति दोनों का संचार होता है. 12 जनवरी को पूरे भारत में स्वामी विवेकानंद का जन्म दिवस मनाया जाता है.

इस अवसर पर देश में कई जगह कई कार्यक्रम भी होने वाले हैं लेकिन एक बांग्ला लेखक ने अपनी किताब में स्वामी जी के विषय कुछ साल पहले ऐसी बातें लिखी थी, जिन्हें पढ़ने के बाद इंसानों के बीच सनसनी फैल गई थी.

मशहूर बांग्ला लेखक शंकर ने अपनी किताब ‘द मॉन्क ऐज मैन’ में किया खुलासा

मशहूर बांग्ला लेखक शंकर ने अपनी किताब ‘द मॉन्क ऐज मैन’ में अध्यात्मिक गुरु स्वामी विवेकानंद के बारे में लिखा कि वो अनिद्रा, मलेरिया, माइग्रेन, डायबिटीज़ समेत दिल, किडनी और लिवर से जुड़ी पूरी 31 बीमारियों के शिकार थे. इसी वजह से उनका सिर्फ 39 साल की उम्र में निधन हो गया था.

एलोपैथिक, होम्योपैथिक और आयुर्वेद का सहारा

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शंकर ने लिखा था कि विवेकानंद ने बीमारियों से निजात पाने के लिए कई तरह के साधनों का प्रयोग किया था, उन्होंने ठीक होने के लिए एलोपैथिक, होम्योपैथिक और आयुर्वेद का सहारा लिया था लेकिन वो असफल रहे थे. उन्हें नींद नहीं आती थी, जिसके कारण वो काफी मानसिक रूप से भी परेशान रहते थे। उनका लीवर सही ढंग से काम नहीं करता था, जिसके कारण वो ठीक से खाना भी नहीं खा पाते थे.

अधिक तनाव और भोजन की कमी के कारण काफी बीमार हो गए थे

लेखक के मुताबिक स्वामी विवेकानंद 1887 में अधिक तनाव और भोजन की कमी के कारण काफी बीमार हो गए थे. उन्हें पथरी भी थी, अनेक रोगों से लड़ते हुए वो काफी कमजोर हो गए थे जिसके कारण ही उन्हें चार जुलाई, 1902 को तीसरी बार दिल का दौरा पड़ा था जिसकी वजह से उन्हें 39 साल की उम्र में दुनिया को अलविदा कहना पड़ा.

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